पब्लिक फर्स्ट। लखनऊ। अभिषेक यादव।
उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए अब केवल हथकड़ी नहीं, बल्कि साइंस का सहारा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में वैज्ञानिक अपराध जांच प्रणाली (Scientific Policing) को अभूतपूर्व गति दी गई है। परिणामस्वरूप, 75,000 से ज्यादा अपराधियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा दिलाई जा चुकी है।
डीएनए से फिंगरप्रिंट तक… टेक्नोलॉजी ने अपराधियों की रातों की नींद उड़ाई
उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपराध स्थल से मिले डीएनए, फिंगरप्रिंट, ब्लड सैंपल, और फॉरेंसिक डेटा को बारीकी से एनालाइज कर रही है।
उंगलियों के निशानों का डेटाबेस अब हाई-स्पीड सर्वर से जुड़ा है, जिससे अपराधियों की पहचान चंद मिनटों में संभव हो रही है।
नई लैबों से बढ़ी रफ्तार, यूपी बना देश में नंबर वन
प्रदेश में नई फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिससे केस सुलझाने की रफ्तार और सटीकता में भारी सुधार हुआ है।
एनसीआरबी (National Crime Records Bureau) की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश वैज्ञानिक अपराध जांच में देश में प्रथम स्थान पर है।
सरकार की प्रतिबद्धता:
अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति।
वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग कर तेज़, निष्पक्ष और प्रभावी जांच।
जनमानस में न्याय प्रणाली के प्रति भरोसे को और मजबूत करना।
