पब्लिक फर्स्ट। उत्तर प्रदेश। राघवेंद्र त्रिपाठी।
कांवड़ यात्रा 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खाने-पीने की दुकानों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर QR कोड लगाए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, यानी अब कांवड़ मार्ग पर सभी दुकानों को QR कोड व लाइसेंस डिस्प्ले करना अनिवार्य रहेगा।
क्या है पूरा मामला:
कांवड़ यात्रा मार्ग पर कानून व्यवस्था और ट्रैकिंग के लिए यूपी सरकार ने सभी दुकानों, भोजनालयों और ढाबों पर प्रेरित QR कोड और लाइसेंस लगाने का आदेश दिया था। इन QR कोड को स्कैन कर के दुकान मालिक की डिटेल्स देखी जा सकेगी। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी, जिसमें दलील दी गई कि इससे व्यापारियों की पहचान सार्वजनिक हो जाएगी और पहले सुप्रीम कोर्ट ऐसी अनिवार्यता पर आपत्ति जता चुका है।
कोर्ट का फैसला:
आज सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के आदेश पर स्टे देने से मना कर दिया और स्पष्ट किया कि दुकानों को QR कोड और वैध लाइसेंस/सर्टिफिकेट प्रदर्शित करना ही होगा, इसमें कुछ भी गलत नहीं है और प्रशासन की ओर से लाइसेंसिंग एवं निगरानी की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायोचित है।
सरकार का पक्ष:
प्रशासन का तर्क है कि QR कोड का मकसद केवल दुकानों की पहचान और खाद्य लाइसेंस की वैधता सुनिश्चित करना है, जिससे कांवड़ यात्रा मार्ग पर पारदर्शिता और सुरक्षा में मदद मिलेगी।
विपक्ष और याचिकाकर्ताओं की दलील:
कुछ सामाजिक संगठनों का कहना था कि इससे दुकानदारों की निजता और सुरक्षा पर प्रश्न खड़े होते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को मुख्य रूप से नहीं माना और आदेश में कोई संशोधन नहीं किया।
