पब्लिक फर्स्ट। उज्जैन। अमृत बैंडवाल ।

लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव के अंतर्गत उज्जैन में एक भव्य और अनोखा आयोजन हुआ, जिसमें 5,000 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं ने मिट्टी के गणेश की प्रतिमाएं बनाकर पर्यावरण संरक्षण और साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। यह आयोजन आगर रोड स्थित चिमनगंज मंडी में हुआ और इसमें शहरभर के स्कूलों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

आयोजन का उद्देश्य

  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और पारंपरिक गणेश उत्सव को नई दिशा देना।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस और पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण को कम कर मिट्टी के गणेश को प्रोत्साहित करना।
  • सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक पर्यावरण चेतना को जोड़ना।

आयोजन की मुख्य झलकियां

  • 35 से अधिक स्कूलों के लगभग 5,000 छात्र-छात्राओं ने मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं।
  • लगभग 100 प्रशिक्षकों ने बच्चों की मदद की और उन्हें पारंपरिक तरीके से मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया।
  • आयोजन की शुरुआत बच्चों ने गणेश मंत्रोच्चार से की।
  • मुस्लिम छात्राओं ने भी श्रद्धा के साथ गणेश प्रतिमाएं बनाईं, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द का अनोखा उदाहरण सामने आया।
  • 300 से अधिक बड़ी प्रतिमाएं भी तैयार की गईं, जिन्हें शहर के गणेश पांडालों में निशुल्क वितरित किया जाएगा।

प्रमुख व्यक्तियों की सहभागिता

  • विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा ने बताया कि यह परंपरा पिछले 14 वर्षों से निरंतर चल रही है।
  • महापौर, सभापति, कलेक्टर सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी खुद मिट्टी के गणेश बनाकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश

  • आयोजन के दौरान बने कचरे की पूरी तरह से सफाई की गई।
  • बच्चों ने संकल्प लिया कि इस गणेशोत्सव पर सिर्फ मिट्टी के गणेश ही बनाएंगे और पूजन करेंगे।
  • यह पहल स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण का मजबूत संदेश देती है।

प्रेरणा और महत्व

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायी उदाहरण भी है। उज्जैन की यह पहल अब अन्य शहरों और राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

publicfirstnews.com

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