पब्लिक फर्स्ट। उज्जैन। अमृत बैंडवाल ।

मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने उज्जैन दौरे के दौरान सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़े विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल परियोजनाओं की प्रगति देखी बल्कि काम कर रहे मजदूरों से सीधे संवाद भी किया। निरीक्षण के दौरान दिया गया उनका बयान एक बार फिर से राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

“मुझे डर नहीं लगता, यदि डरता तो सरकार नहीं गिराता” – सिलावट

निरीक्षण के दौरान जब मंत्री सिलावट से पूछा गया कि क्या कान्ह डक्ट के 100 फीट गहरे हिस्से में उतरने से डर नहीं लगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:

“मुझे डर नहीं लगता, यदि मैं डरता तो सरकार नहीं गिराता।”

यह बयान सीधे तौर पर 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा करता है, जब वे ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए थे और कमलनाथ सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी।

919 करोड़ की लागत से बन रहा कान्ह डक्ट, मंत्री खुद उतरे 100 फीट नीचे

  • मंत्री सिलावट ने उज्जैन के लिए बेहद महत्वपूर्ण कान्ह डक्ट परियोजना का निरीक्षण किया।
  • करीब 919 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस डक्ट का काम 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
  • मंत्री खुद 100 फीट गहरे हिस्से में उतरे और काम की गुणवत्ता जांची।
  • उन्होंने मजदूरों से बातचीत की, उन्हें मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और उनकी मेहनत की सराहना की।

सिंहस्थ के लिए प्रमुख घोषणाएँ

  • सिंहस्थ 2028 तक सभी विकास कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे।
  • सेवरखेड़ी डेम के पानी का उपयोग सिंहस्थ में शाही स्नान के लिए होगा, जिससे श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जाएगा।
  • कान्ह डक्ट से दूषित पानी को शुद्ध कर सिंचाई व अन्य उपयोगों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  • सिंहस्थ जैसे विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन के लिए पानी की निर्बाध व्यवस्था की जाएगी।

उज्जैन सिंहस्थ का महत्व

उज्जैन सिंहस्थ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र शिप्रा नदी में स्नान के लिए आते हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापक विकास कार्य शुरू किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को उत्तम सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

राजनीतिक और प्रशासनिक सन्देश

मंत्री तुलसी सिलावट का यह दौरा केवल तकनीकी निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा।

उनका बयान यह दर्शाता है कि वे राजनीतिक दृढ़ता और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों निभाने में पीछे नहीं हटते।

सिंहस्थ को लेकर उनकी प्रतिबद्धता और मजदूरों से सीधे संवाद ने यह संदेश दिया कि सरकार जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी कर रही है।

निष्कर्ष:

मंत्री तुलसी सिलावट का उज्जैन दौरा सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का वास्तविक आकलन था। कान्ह डक्ट जैसी बड़ी परियोजना और साफ पानी की व्यवस्था श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव दिलाने में निर्णायक होगी। वहीं, उनके बयानों ने एक बार फिर से राजनीति और प्रशासन दोनों में उनकी मजबूत छवि को सामने रखा है।

publicfirstnews.com

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