लेखक : कृष्णमोहन झा

देश में जनजातीय समुदायों की बहुलता वाले राज्यों में मध्यप्रदेश का नंबर सबसे ऊपर है । मध्यप्रदेश की लगभग साढ़े सात करोड़ आबादी का पांचवां हिस्सा आदिवासियों का है और मध्यप्रदेश के जिन जिलों में आदिवासी समुदायों की बहुलता है उनमें मंडला को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर बसे मंडला की धरती पर ऐसी अनेक विभूतियों ने जन्म लिया है जिन्होंने आदिवासी समाज के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए अपने सराहनीय योगदान से न केवल मंडला जिले अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है।

इन यशस्वी विभूतियों में संपतिया उइके का नाम प्रमुखता से लिया जाता है जो लगभग डेढ़ वर्षों से मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय का कार्य भार दक्षता पूर्वक रही हैं। अत्यंत सहज , सरल और विनम्रता की प्रतिमूर्ति संपतिया उइके ने अपने सार्वजनिक जीवन में जो यश अर्जित किया है वह उनके चार दशकों के कठिन संघर्ष , त्याग और तपस्या का प्रतिफल है। संपतिया उइके हमेशा से ही प्रदेश में भाजपा के उन जुझारू नेताओं की अग्रिम पंक्ति में शामिल रही हैं जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। अपने लगभग चार दशक के राजनीतिक सफर में संपतिया उइके ने बड़ी से बड़ी चुनौती को भी हंसकर स्वीकार किया और उस पर जीत हासिल की। यूं तो संपतिया उइके के ऐसे विरोधियों की संख्या भी कभी कम नहीं रही जिनने इस जीवट आदिवासी महिला नेता के पथ में अवरोध खड़े करने में कोई कसर नहीं छोड़ी परंतु अंततः उनके विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी। मैं संपतिया उइके के राजनीतिक सफर का साक्षी रहा हूं और यह बात दावे के साथ कह सकता हूं कि संपतिया उइके ने अपनी अद्भुत सहन शक्ति, साहस और सूझबूझ से हमेशा अपने विरोधियों को आश्चर्यचकित किया है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी संपतिया उइके के इन गुणों के कायल हैं और यही कारण है कि संपतिया उइके की गणना मुख्यमंत्री यादव के विश्वासपात्र निकटतम मंत्रिमंडलीय सहयोगियों में की जाती है । संपतिया उइके की सराहनीय कार्यशैली और कर्मठता ने मुख्यमंत्री के इस विश्वास को विगत डेढ़ वर्षों में निरंतर मजबूत किया है। संपतिया उइके के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वे अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाती और बड़े से बड़ा प्रलोभन भी उन्हें उनके कर्तव्य पथ से विचलित नहीं कर सकता।

यूं तो संपतिया उइके ने अपने सुदीर्घ राजनीतिक जीवन में अनेकों उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं परन्तु 4 सितंबर 1967 को मंडला जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी इस यशस्वी आदिवासी नेता का बचपन अभावों से संघर्ष करते हुए बीता। थोड़ी बड़ी हुई तो पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए अनिवार्य अर्थोपार्जन हेतु उन्होंने मजदूरी करने से भी परहेज़ नहीं किया। शिक्षार्जन के पश्चात् उन्होंने शिक्षकीय व्यवसाय को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया और अल्पकाल में ही विद्यार्थियों की चहेती शिक्षिका के रूप में उनकी ख्याति आसपास के क्षेत्रों तक फैल गई परंतु उनके भाग्य में तो विधाता ने पहले से ही समाज सेवा का क्षेत्र चुन रखा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत मंडला जिले के टिकरवारा ग्राम पंचायत के सरपंच का चुनाव जीत कर की ।

यहां से शुरू हुए अपने राजनीतिक सफर में इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे तीन बार जिला पंचायत की सदस्य निर्वाचित हुईं। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पुनीत भावना से संपतिया उइके ने महिला स्व-सहायता समूहों के गठन की जो पहल की उसके लिए उन्हें पर्याप्त सराहना मिली। कालांतर में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे के आकस्मिक निधन से रिक्त हुई सीट के लिए भाजपा ने संपतिया उइके का चयन किया । 2023 में संपन्न विधानसभा चुनावों में उन्होंने जब मंडला से राज्य विधानसभा में प्रवेश किया तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी।

तब से वे मोहन यादव सरकार की महत्वपूर्ण सदस्य बनीं हुईं। राज्य सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में भी उनकी राय की अपनी अहमियत होती है। संपतिया उइके का राजनीतिक सफर शून्य से शिखर की प्रेरक गाथा से कम नहीं है। उनके राजनीतिक सफर में अभी और कई महत्वपूर्ण पड़ाव आना बाकी हैं। मैं उनके जन्म दिवस के अवसर पर इस लेख के माध्यम से उन्हें हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।

लेखक : कृष्णमोहन झा
( लेखक राजनैतिक विश्लेषक )

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