अंकुर खेल मैदान में आयोजित महर्षि मैत्री क्रिकेट मैच श्रृंखला (सत्र-06) का आयोजन इस बार एक अनोखा सांस्कृतिक और खेलमयी अनुभव लेकर आया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम भोपाल के अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी उपस्थित रहे।

यह मैच केवल क्रिकेट का आयोजन नहीं था, बल्कि संस्कृत भाषा के संरक्षण और जनजागरण की दिशा में एक अनोखी पहल भी साबित हुई। खिलाड़ियों ने भारतीय पारंपरिक वेष-भूषा में मैदान में उतरकर बल्ला-गेंद के साथ संवाद, कमेंट्री और उत्साहवर्धन संपूर्ण रूप से संस्कृत में किया। इस अनोखे प्रयोग ने दर्शकों और खिलाड़ियों दोनों में ही उत्साह और रोमांच का वातावरण पैदा किया।

मुख्य अतिथि श्री सूर्यवंशी ने अपने संबोधन में कहा,
“संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, यह भारतीय सभ्यता की आत्मा है और विश्व की अनेक भाषाओं की जननी भी है। युवा पीढ़ी को इसे अपने दैनिक जीवन से जोड़ना चाहिए। ऐसे आयोजन भाषा और संस्कृति के प्रति उनके प्रेम को और बढ़ावा देते हैं।”

खेल के दौरान किए गए संस्कृत संवाद और कमेंट्री ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मैदान में बैठे लोगों ने उत्साहवर्धन और खेल के रोमांच का आनंद लेते हुए देखा कि कैसे पारंपरिक भाषा आधुनिक खेल में भी जीवंत रह सकती है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, युवा और संस्कृत प्रेमी उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की और इसे संस्कृत पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। आयोजकों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियाँ युवाओं में भाषा, संस्कृति और खेल के प्रति लगाव पैदा करती हैं।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि खेल और संस्कृति एक साथ मिलकर भाषा, परंपरा और आधुनिक मनोरंजन का अद्वितीय संगम प्रस्तुत कर सकते हैं। आयोजकों ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में इस तरह की पहल और भी अधिक व्यापक स्तर पर की जाएगी, ताकि युवाओं को खेल और संस्कृति दोनों के प्रति प्रेरित किया जा सके।

इस तरह अंकुर खेल मैदान इस बार न केवल क्रिकेट का मैदान बना, बल्कि संस्कृत प्रेमियों और खेल प्रेमियों का सांस्कृतिक मिलन स्थल भी बन गया।

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