जिला अस्पताल रायसेन में मरीजों को बेहतर उपचार के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऑटोमेटिक फ्लोर क्लीनिंग मशीन से सफाई की शुरुआत की गई। शुक्रवार को इस मशीन का शुभारंभ सीएमएचओ डॉ. दिनेश खत्री एवं सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बाल्यान की उपस्थिति में किया गया।

यह पहल कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा के निर्देशानुसार अस्पताल परिसर की स्वच्छता व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए की गई है। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. खत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ, सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त वातावरण मिल सके।

उद्घाटन के बाद क्या होगा मशीन का भविष्य?

हालांकि इस पहल के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या यह ऑटोमेटिक सफाई मशीन नियमित रूप से संचालित होगी या फिर यह भी केवल उद्घाटन और फोटो सेशन तक ही सीमित रह जाएगी।

जिले के विभिन्न अस्पतालों और चिकित्सा परिसरों में पूर्व में भी कई आधुनिक मशीनें लाई गईं, जिनका उपयोग कुछ ही दिनों में बंद हो गया। कई मशीनें आज भी कार्यालयों और स्टोर रूम में धूल फांकती नजर आती हैं। इसका मुख्य कारण यह रहा कि न तो मशीनों के संचालन के लिए स्थायी कर्मचारी नियुक्त किए गए और न ही किसी अधिकारी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई।

स्थानीय नागरिकों और अस्पताल स्टाफ का कहना है कि प्रशासन अक्सर आधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन तो बड़े स्तर पर करता है, लेकिन उनके नियमित संचालन, रखरखाव और मानव संसाधन की व्यवस्था पर ध्यान नहीं देता। बाद में “कर्मचारियों की कमी” का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।

स्वच्छता और गुणवत्ता के नाम पर करोड़ों रुपये की मशीनें खरीदी जाती हैं, लेकिन यदि उनका वास्तविक उपयोग न हो तो यह सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जरूरत इस बात की है कि केवल उद्घाटन तक सीमित न रहकर मशीनों के नियमित, पारदर्शी और जवाबदेह उपयोग को सुनिश्चित किया जाए।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला अस्पताल रायसेन की यह ऑटोमेटिक फ्लोर क्लीनिंग मशीन वास्तव में मरीजों के लिए राहत साबित होती है या फिर अन्य मशीनों की तरह कागजों और उद्घाटनों तक ही सिमट कर रह जाती है।

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