भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ गौतम गंभीर ने आध्यात्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर भस्म आरती में सहभागिता की। मंगलवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित इस दिव्य आरती के दौरान गौतम गंभीर पूरी तरह भक्तिभाव में लीन नजर आए।
गंभीर अपने सहायक शीतांशु कोटमराजू के साथ तड़के मंदिर परिसर पहुँचे। उन्होंने नंदी हॉल में विधिवत रूप से बैठकर लगभग दो घंटे तक पूजा-अर्चना की और भगवान शिव की आराधना में समय बिताया। इस दौरान उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया, जो मंदिर की विशेष और दुर्लभ धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है।
मंदिर पहुंचने पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया द्वारा गौतम गंभीर का स्वागत किया गया। दर्शन के समय मंदिर परिसर में आध्यात्मिक शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जिसमें गंभीर पूरी तरह तल्लीन दिखाई दिए।
दर्शन के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में गौतम गंभीर ने कहा,
“बाबा महाकाल ने मुझे बुलाया और यहाँ आने का सौभाग्य मिला। दर्शन बहुत शांतिपूर्ण रहे और मंदिर की व्यवस्थाएँ अत्यंत सराहनीय हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि बाबा मुझे फिर बुलाएँगे और मैं दोबारा जरूर आऊँगा।”
गौतम गंभीर की यह धार्मिक यात्रा ऐसे समय में सामने आई है, जब वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में एक नई जिम्मेदारी निभा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस आध्यात्मिक अनुभव से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिली है, जो आने वाले समय में उनके निर्णयों और नेतृत्व क्षमता में झलक सकती है।
क्रिकेट और अध्यात्म के इस संगम ने यह संदेश दिया है कि खेल जगत की व्यस्त और दबाव भरी ज़िंदगी में भी आस्था और विश्वास व्यक्ति को संतुलन प्रदान करते हैं। गंभीर का यह दौरा न केवल उनके व्यक्तिगत विश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय संस्कृति में भक्ति और कर्म का गहरा संबंध है।
गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसमें शामिल होना अत्यंत सौभाग्य की बात मानी जाती है। गौतम गंभीर की उपस्थिति ने एक बार फिर इस आध्यात्मिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
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