मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित करते हुए किसानों के समग्र विकास, कृषि आय में वृद्धि तथा सभी संबंधित विभागों तथा जिला प्रशासन के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से सभी कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को विस्तृत दिशा‑निर्देश दिए। यह बैठक मुख्यतः किसान कल्याण वर्ष‑2026 के लक्ष्यों की प्राप्ति और कार्यक्रमों के सुचारू आयोजन पर केंद्रित थी।

मुख्य बिंदु और दिशा‑निर्देश:

किसान कल्याण वर्ष‑2026 की विशेष प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें कृषि विकास को “समृद्ध किसान‑समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों की नीतियों और योजनाओं में किसान हित को केंद्र में रखा जाए।

योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन

डॉ. यादव ने कहा कि 16 से अधिक विभाग — जैसे कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा — आत्म‑समन्वय के साथ कार्य करें ताकि किसानों को लाभों का सीधा प्रभाव मिल सके।

लाभार्थी केंद्रित कार्यक्रमों का प्रभाव

मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ और ‘भावांतर भुगतान योजना’ जैसी प्रमुख पहलों को गति देने का निर्देश दिया। इस वर्ष अब तक 1.17 लाख सोयाबीन किसानों के खातों में ₹200 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है, और योजना को सरसों तथा मूंगफली तक विस्तारित करने की योजना है।

बेहतर कृषि अवसंरचना एवं आय वृद्धि

उन्होंने सिंचाई, कृषि विपणन, कृषि‑आधारित उद्योगों तथा फूड‑प्रोसेसिंग इकाइयों के विकास पर विशेष बल दिया। इससे केवल फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि किसानों की आय के विविध स्रोत भी मजबूत होंगे।

जिला स्तर पर कार्यान्वयन की जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को स्थानीय कार्यक्रमों, समीक्षा बैठकें और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि योजनाओं का प्रभाव वास्तविक स्तर पर दिखाई दे। वे अधिकारियों से सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाए रखने की बात भी कह रहे हैं।

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