इंदौर के गौरव और देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शामिल डेली कॉलेज परिसर आज एक अत्यंत प्रेरणादायक, विचारोत्तेजक और समाज को दिशा देने वाले कार्यक्रम का साक्षी बना, जब दिव्य संतान प्रकल्प के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—समाज को स्वस्थ, संस्कारी, मानसिक रूप से सशक्त और जागरूक पीढ़ी के निर्माण के लिए प्रेरित करना।

कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुख्य आतिथ्य से। उनके साथ मंच पर प्रबुद्ध शिक्षाविद, चिकित्सा एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सामाजिक चिंतक और दिव्य संतान प्रकल्प से जुड़े वरिष्ठ वक्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में छात्रों, अभिभावकों, युवा दंपत्तियों, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति विषय की गंभीरता और प्रासंगिकता से गहराई से जुड़ा हुआ दिखाई दिया।

अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संतान का निर्माण केवल जन्म के बाद शुरू नहीं होता, बल्कि उसकी नींव गर्भधारण से पहले और गर्भकाल के दौरान ही पड़ जाती है। माता-पिता की सोच, मानसिक स्थिति, आचरण, खान-पान और जीवनशैली—ये सभी तत्व आने वाली पीढ़ी के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों ने गर्भ संस्कार की वैज्ञानिक, मानसिक और आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गर्भकाल के दौरान सकारात्मक विचार, शांत मन, संतुलित दिनचर्या और नैतिक मूल्यों से युक्त वातावरण शिशु के मानसिक और भावनात्मक विकास में निर्णायक भूमिका निभाता है।
यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन और सुदृढ़ संस्कार ही किसी भी सशक्त समाज की आधारशिला होते हैं।

माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज के तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवन में ऐसे सामाजिक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि हम वास्तव में राष्ट्र और समाज का उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, तो हमें परिवार से शुरुआत करनी होगी और भावी पीढ़ी के निर्माण को गंभीरता से लेना होगा।
उन्होंने दिव्य संतान प्रकल्प को समाज के लिए दूरदर्शी और समयानुकूल पहल बताया और इसके व्यापक प्रभाव की सराहना की।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद। इस सत्र में अभिभावकों और युवा दंपत्तियों ने खुलकर अपने प्रश्न पूछे—चाहे वे मानसिक तनाव से जुड़े हों, गर्भकालीन सावधानियों से, या बच्चों में संस्कार विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों से। विशेषज्ञों ने सरल, वैज्ञानिक और व्यावहारिक भाषा में सभी प्रश्नों के उत्तर दिए, जिससे श्रोता स्वयं को सशक्त और आश्वस्त महसूस करते दिखे।

डेली कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों और अभिभावकों पर गहरा प्रभाव छोड़ गया। विद्यार्थियों ने इसे केवल एक व्याख्यान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला अनुभव बताया।

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