पब्लिक फर्स्ट। भोपाल ।पुनीत पटेल।
11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैं दोनों हाथ जोड़कर सभी योग साधकों को प्रणाम करता हूं।
आज का दिन भारत के मूल दर्शन, जीवन शैली और हजारों वर्षों पुरानी हमारी योग परंपरा से पूरी दुनिया को परिचित कराने का गौरवशाली दिवस है।
आज ही के दिन सूर्य नारायण देवता उत्तरायण की यात्रा पूर्ण कर दक्षिणायन की ओर प्रस्थान करते हैं।
आज वर्ष का सबसे बड़ा दिन है और इसके बाद रातें लंबी होने लगती हैं।
योग के माध्यम से हमारा मन शांत होता है, शांति से संतोष प्राप्त होता है और संतोष से हम अहिंसा की ओर बढ़ते हैं।
अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए हम अपनी मूल अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम् की ओर अग्रसर होते हैं।
हमारे लिए संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार के समान है।
कोविड काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “जियो और जीने दो” की भावना का साक्षात् रूप देखा गया।
देशवासियों की रक्षा के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी ने 100 से अधिक देशों को दवाइयां और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान कर वसुधैव कुटुंबकम् की मूल भावना का परिचय दिया।
मैं महर्षि पतंजलि को नमन करता हूं, जिन्होंने योग साधना के माध्यम से हमें अष्टांग सूत्र प्रदान किया।
जन्म से मृत्यु तक की इस यात्रा में परमात्मा हमें यश प्रदान करें, हमारे मन के भावों को प्रकृति से जोड़ें और हम सभी के साथ सदैव खड़े रहें।
योग दिवस के इस पावन अवसर पर मेरी ओर से सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
