पब्लिक फर्स्ट। उज्जैन। अमृत बैंडवाल ।

धार्मिक नगरी उज्जैन में माँ ज्ञानेश्वरी ग्रुप द्वारा गणेश उत्सव इस वर्ष भी अत्यंत भव्यता और गहरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लक्कड़गंज क्षेत्र में विशाल पंडाल सजाया गया है, जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और झांकियों का आनंद ले रहे हैं। देर रात तक चलने वाला यह उत्सव भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति और भक्ति रस में सराबोर कर रहा है।

आयोजन की मुख्य विशेषताएँ

16 फीट ऊँची गणेश प्रतिमा

इस बार की भव्य गणेश प्रतिमा बुरहानपुर से विशेष रूप से लाकर गरुड़ जी पर विराजमान की गई है। इस अद्वितीय प्रतिमा का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

18 वर्षों की परंपरा

माँ ज्ञानेश्वरी ग्रुप पिछले 18 वर्षों से लगातार भव्य गणेश प्रतिमा स्थापना की परंपरा निभा रहा है। हर वर्ष नए थीम और नवाचार के साथ भक्तों को अनूठा अनुभव कराया जाता है।

हॉरर गुफा थीम

इस बार की झांकियों में विशेष रूप से हॉरर गुफा बनाई गई है। इसके अंदर श्रद्धालुओं को वृंदावन के प्रेम मंदिर और गिरिराज जी की परिक्रमा के दृश्य देखने को मिलते हैं।

भक्ति और अद्भुत झलकियाँ

गुफा के अंदर भक्त श्रीकृष्ण-राधा और संत कृपानंद महाराज के दर्शन कर सकते हैं। गुफा के अंत में ‘भूत बंगला’ झांकी सबसे आकर्षक है, जहाँ कलाकार भूत के गेटअप में देशभक्ति गीतों और नारों के साथ भक्तों का स्वागत कर रहे हैं।

धार्मिक-सांस्कृतिक संदेश

पंडाल में सजाई गई झांकियों में धार्मिक कथाओं, भक्ति संदेशों और वैदिक संस्कृति का अद्भुत मिश्रण है।

धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से खास

माँ ज्ञानेश्वरी ग्रुप का आयोजन सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पंडाल में स्थापित गणेश प्रतिमाएं मिट्टी से निर्मित हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और परंपरागत आस्थाओं का प्रदर्शन भी किया गया है।

उत्सव का वातावरण

27 अगस्त से 8 सितंबर 2025 तक चलने वाले इस गणेश उत्सव में उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। आयोजन स्थल को रंगीन लाइटिंग, साउंड इफेक्ट्स और आकर्षक सजावट से सजाया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का उल्लास फैला हुआ है।

निष्कर्ष

माँ ज्ञानेश्वरी ग्रुप का यह गणेश उत्सव न सिर्फ श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक जागरूकता और पर्यावरणीय संदेशों का भी मंच बन चुका है। धार्मिक प्रस्तुतियों, भक्ति भाव और झांकियों के अद्भुत संयोजन ने इस आयोजन को उज्जैन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर दिया है।

publicfirstnews.com

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