भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित किसान रथ–किसान रैली के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने उपस्थित जनसमूह और दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह दृश्य था आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध पुंगनूर गौ वंश का—छोटे कद की यह दुर्लभ और स्वदेशी भारतीय नस्ल अपनी पवित्रता और उच्च गुणवत्ता वाले दूध के लिए देशभर में विख्यात है।
तिरुपति मंदिर से जुड़ा पावन महत्व
पुंगनूर गाय का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशेष है। तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में अर्पित होने वाला भोग-प्रसाद इसी पुंगनूर गाय के दूध से तैयार किया जाता है, जो इसकी पवित्रता और विशिष्टता को दर्शाता है।
स्वदेशी गौवंश पर राष्ट्रीय ध्यान
कुछ समय पूर्व जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पूजन कक्ष में ‘दीप ज्योति’ नामक पुंगनूर बछड़े के साथ दृश्य सामने आया था, तब पूरे देश में स्वदेशी गौवंश, भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर नई जागरूकता देखने को मिली थी।
आज मध्यप्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के शुभारंभ के अवसर पर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत, भोपाल के जंबूरी मैदान के निकट आयोजित किसान रथ और रैली ने किसान सशक्तिकरण का एक नया अध्याय रचा।
किसान, संस्कृति और गौ-संरक्षण का संगम
इस आयोजन में किसान, भारतीय संस्कृति और गौ-संरक्षण एक साथ दिखाई दिए। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि मध्यप्रदेश में कृषि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के साथ आगे बढ़ रहा है।
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