मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा महाकाल के दर्शन कर महाकाल महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। पांच दिवसीय यह भव्य आयोजन 14 से 18 जनवरी तक महाकाल लोक में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन की संगीतमय प्रस्तुति ने महाकाल लोक में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण रच दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप प्रदेश सरकार पहली बार धर्मनगरी उज्जैन में महाकाल महोत्सव का आयोजन कर रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में धर्म, संस्कृति, कला और जन-उत्सव का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा।

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सदस्य बाल योगी संत उमेशनाथ महाराज, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया तथा विधायक अनिल जैन सहित अनेक जनप्रतिनिधि और संतगण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा इस अवसर पर महाकाल भक्त निवास की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में श्रावण महोत्सव की परंपरा रही है और अब महाकाल महोत्सव की भी शुरुआत हो गई है, जिसे प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। उन्होंने धर्मनगरी उज्जैन की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महाकाल लोक की दीवारों पर महापुरुषों के चित्र और उनका जीवन दर्शन अंकित है। समय के साथ उज्जैन की छटा भी निरंतर बदल रही है और यह नगरी स्वर्ग से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल कालों के भी काल हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि राजधानी भोपाल की तर्ज पर अब उज्जैन में भी वन मेला आयोजित किया जाएगा, जो दशहरा मैदान में लगेगा। इसके साथ ही उज्जैन में शीघ्र ही स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। आने वाले समय में उज्जैन को विकास से जुड़ी कई और सौगातें मिलने वाली हैं।

मुख्यमंत्री के उद्बोधन के बाद गायक शंकर महादेवन ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से महाकाल लोक को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

उल्लेखनीय है कि महाकाल महोत्सव के इस पांच दिवसीय आयोजन में शिव तत्व की अनुभूति, दर्शन, कला और जन-उत्सव का संगम देखने को मिलेगा। देश-विदेश के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। अंतरराष्ट्रीय विचारक, संत एवं आध्यात्मिक गुरु अपने विचार व्यक्त करेंगे। इसके साथ ही लोक कला, बैंड, बहुरूपिए, प्रदर्शनी, पतंग उत्सव और भव्य शिव बारात जैसे आकर्षक आयोजन भी होंगे।

महोत्सव के अंतर्गत उज्जैन के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थलों—काल भैरव मंदिर, चिंतामन गणेश, गढ़ कालिका और भर्तहरि गुफा—को भी विशेष रूप से केंद्रित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उज्जैन की समृद्ध धार्मिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

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