महाकाल की नगरी उज्जैन में विकास के नाम पर प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। सांदीपनि चौराहा से उदयन मार्ग (विक्रम मार्ग) तक सड़क चौड़ीकरण के प्रस्ताव के विरोध में शुक्रवार को लक्ष्मी नगर चौराहे पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे, व्यापारी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। विरोध के प्रतीक स्वरूप कई दुकानों को बंद रखा गया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने प्रशासन और नगर निगम की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां रहकर व्यापार कर रहे लोगों के सामने आज रोजी-रोटी और घर बचाने का संकट खड़ा हो गया है। नगर निगम के प्रस्ताव के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की जद में 26 मकान और 16 मंदिर आ रहे हैं। प्रशासन द्वारा विस्थापन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपर्याप्त और अव्यावहारिक बता रहे हैं।
भरत पोरवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के जीवन और व्यवसाय पर हमला किया गया, तो जनता को मजबूरन और बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने शहर की बदहाल बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नालियां कचरे से भरी हैं, कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और सड़कों की हालत जर्जर है। जनता के टैक्स का पैसा पहले मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए, न कि बिना सहमति के तोड़फोड़ पर।
स्थानीय रहवासी दिनेश पाटीदार ने कहा कि मौजूदा सड़क पहले से ही पर्याप्त चौड़ी है और यहां किसी प्रकार का गंभीर ट्रैफिक दबाव नहीं रहता। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता समझ से परे है। वहीं, व्यापारी प्रवीण जैन ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रोजेक्ट से पहले कोई विधिवत सर्वे नहीं किया गया और नपती भी गलत तरीके से की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और सड़क चौड़ीकरण की योजना पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विरोध पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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