रायसेन के सांची में शिक्षा का अपमान, मासूमों से कराई जा रही सफाई
देश आज 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा था। राजधानी में संविधान, अधिकारों और लोकतंत्र की मजबूती की बातें हो रही थीं। प्रधानमंत्री देश के बच्चों और बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए “लाड़ली बहना” और “स्कूल चलो” जैसे अभियानों पर ज़ोर दे रहे थे।
लेकिन मध्यप्रदेश के रायसेन ज़िले से शिक्षा व्यवस्था का एक ऐसा शर्मनाक चेहरा सामने आया, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बच्चों से पढ़ाई नहीं, कराई जा रही झाड़ू-पोछा
मामला रायसेन ज़िले के सांची विकासखंड के एक प्राथमिक शासकीय स्कूल का है, जहाँ गणतंत्र दिवस के दिन छोटे-छोटे मासूम बच्चों से सफाई कराई गई। बच्चों ने कैमरे पर खुद बताया कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है।
बच्चों का कहना है—
“हमसे रोज़ झाड़ू लगवाई जाती है। टीचर आते हैं, खड़े रहते हैं और हमसे सफाई करवाते हैं।”
जहाँ एक ओर देश नई शिक्षा नीति, डिजिटल क्लासरूम, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ और स्कूल चलो अभियान की बातें कर रहा है, वहीं इस स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराना आम बात बन चुकी है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- क्या प्राथमिक शिक्षक का काम बच्चों से झाड़ू लगवाना है?
- क्या पढ़ाई से ज़्यादा जरूरी स्कूल की सफाई है?
- क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी, या जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?
यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की गंभीर विफलता को उजागर करता है। जिस ज़िले को विकास का मॉडल बताया जाता है, वहीं बच्चों के अधिकारों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से सवाल
- क्या मुख्यमंत्री की “शिक्षा प्राथमिकता” सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
- क्या शिक्षा मंत्री इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर इसे जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर बच्चों से झाड़ू लगवाना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना का अपमान है।
जनता की मांग
✔ दोषी शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई हो
✔ स्कूलों में बच्चों से काम करवाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगे
✔ जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
PUBLICFIRSTNEWS.COM
