छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति और विकास की दिशा में एक बड़ी सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

इन कैडरों पर कुल ₹85 लाख से अधिक का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़ लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण भी है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से बाहर निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।”

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