राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण बाजार स्थापित करने हेतु अनुदान सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य महिला समूहों को उनके हस्तनिर्मित उत्पादों के विपणन और बिक्री के लिए स्थायी मंच प्रदान करना है।
नाबार्ड द्वारा संचालित ‘ग्राम दुकान’ पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। राजनांदगांव स्थित पाताल भैरवी मंदिर के पास स्थापित ग्राम दुकान, महिला स्व-सहायता समूहों के लिए हुनर, कौशल और लघु उद्यम को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
इस ग्राम दुकान में महिला समूह विभिन्न स्थानीय उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराती हैं। इनमें पूजा सामग्री, अचार, पापड़, मुरकू, मुरब्बा, मोमबत्ती, अगरबत्ती, साबुन, जिमीकंद, फूल, मशरूम, कपड़े, मसाले, दोना-पत्तल, डेकोरेशन आइटम्स और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। समूह अपनी उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग के साथ ग्राहकों को पेश करती हैं, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है।
ग्राम दुकान की संचालिका श्रीमती निशा मंडावी ने बताया कि पाताल भैरवी मंदिर के समीप होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं से उत्पादों को उत्कृष्ट प्रतिसाद मिल रहा है।
इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को नि:शुल्क दुकान की सुविधा प्रदान की गई है, जिससे उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सुलभ और स्थायी मंच मिला है। नाबार्ड की यह पहल महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
‘ग्राम दुकान’ योजना न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कर रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
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