मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि को तीसरी बार बढ़ाए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने राज्य सरकार पर किसानों के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अरुण यादव ने कहा कि प्रदेश के किसान अपनी महीनों की मेहनत के साथ खुले आसमान के नीचे खड़े हैं, जबकि सरकार बार-बार उपार्जन की तारीख आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की व्यवस्थाएं कमजोर हैं, जिसके कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि पहले उपार्जन की अंतिम तिथि 16 मार्च तय की गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 1 अप्रैल किया गया और अब इसे 10 अप्रैल तक आगे बढ़ा दिया गया है। यादव के मुताबिक, यह स्थिति प्रशासनिक तैयारी की कमी को दर्शाती है।

कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार को किसानों के प्रति असंवेदनशील बताते हुए कहा कि किसानों की फसल खेतों और खलिहानों में पड़ी है, जिससे नुकसान का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उपार्जन प्रक्रिया को तेज किया जाए और किसानों को समय पर राहत दी जाए।

हालांकि, सरकार की ओर से तिथि बढ़ाने को लेकर यह तर्क दिया जाता रहा है कि किसानों को सुविधा देने और अधिक से अधिक उपार्जन सुनिश्चित करने के लिए समय बढ़ाया जाता है। इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन हर साल एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, जिससे लाखों किसान जुड़े होते हैं। ऐसे में तिथि बढ़ाने और व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।

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