मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार में आयोजित गंगा दशहरा के अवसर पर राज्य स्तरीय जल संरक्षण कार्यक्रम में कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि धार स्थित भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य “सरस्वती लोक” का निर्माण करेगी, जिससे यह क्षेत्र आस्था, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राजा भोज के नाम पर “राजा भोज शोध संस्थान” की स्थापना की जाएगी, ताकि इस ऐतिहासिक नगरी की प्राचीन ज्ञान परंपरा, अनुसंधान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और आगे बढ़ाया जा सके।
भोजशाला को मिलेगा नया स्वरूप
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भोजशाला मामले में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का राज्य सरकार अक्षरशः पालन कराएगी। उन्होंने इसे 750 वर्षों के संघर्ष के बाद न्याय और ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि भोजशाला कभी ज्ञान, विज्ञान और संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां देश-विदेश से विद्वान अध्ययन के लिए आते थे। अब सरकार इसे उसी गौरवशाली स्वरूप में पुनः विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
जल संरक्षण पर बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज जल संरक्षण के अग्रदूत थे और धार को कभी “तालाबों की नगरी” कहा जाता था। यहां विकसित 12.5 तालाबों की प्रणाली आज भी अद्भुत जल प्रबंधन का उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में चल रहा “जल गंगा संवर्धन अभियान” देश में सबसे प्रभावी अभियानों में से एक है, जिसमें लाखों जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया जा रहा है।
88.04 करोड़ के 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने धार जिले में कुल 88.04 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।
इसमें चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर बनने वाला 27.21 करोड़ रुपये का फोरलेन उच्च स्तरीय पुल भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार में अब विकास की नई धारा बहेगी और आसपास के क्षेत्रों में भी व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे।
सरस्वती लोक और शहरी विकास योजना

सरस्वती लोक परियोजना के तहत भोजशाला परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा और इसे आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
परियोजना में श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था, भव्य कॉरिडोर, पार्किंग, दर्शक दीर्घा और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज की कर्मभूमि धार में एक विशेष शोध संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति पर अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इसके साथ ही भोपाल में भी राजा भोज संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है।

शहीदों के परिजनों को आर्थिक सहायता
भोजशाला आंदोलन के दौरान शहीद हुए तीन व्यक्तियों — स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह और स्व. लक्ष्मण सिंह — के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई।
कार्यक्रम में इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और मौन रखकर सम्मान दिया गया।

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश की उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक हजारों जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
- 89,000 से अधिक कुओं का रिचार्ज
- 55,000 से अधिक खेत तालाब
- 105 अमृत सरोवर का निर्माण
- 2 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य प्रगति पर
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य बन चुका है।
ऐतिहासिक धरोहर पर विस्तृत दृष्टि
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज ने विश्व प्रसिद्ध बड़े तालाब, भोजपुर शिवलिंग और अनेक जल संरचनाओं का निर्माण कर अद्भुत इंजीनियरिंग का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि उनकी विरासत आज भी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का गौरव बढ़ाती है।
धार में आयोजित यह कार्यक्रम केवल विकास योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर सामने आया है।
सरस्वती लोक, राजा भोज शोध संस्थान और व्यापक विकास कार्यों के माध्यम से धार को एक नए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
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