HIGHLIGHTS FIRST :

  • बुकिंग मुकेश की आता है अफ़ज़ल ?
  • ⁠फ़र्ज़ी ID से डिलेवरी नेटवर्क ??
  • ⁠क्या सुरक्षित है online network ?

डिस्क्लेमर:

नीचे स्क्रीन पर दिखाए गए व्यक्ति का चेहरा कानूनी और गोपनीयता कारणों से ब्लर किया गया है। PUBLIC FIRST के पास मूल तस्वीर और शिकायत से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित हैं।

भोपाल में एक हालिया घटना ने ऑनलाइन बाइक टैक्सी और डिलीवरी प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक डिलीवरी पार्टनर किसी अन्य व्यक्ति के नाम और प्रोफाइल से सेवा दे रहा था। यानी ऐप पर एक नाम और तस्वीर दिखाई गई, लेकिन मौके पर पहुंचा व्यक्ति कोई और था।

यदि ऐसा है, तो यह केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि यात्रियों और ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है।

आखिर खतरा क्या है?

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोग इसलिए भरोसा करते हैं क्योंकि ऐप पर चालक या डिलीवरी पार्टनर का नाम, फोटो और पहचान दिखाई जाती है। लेकिन यदि ऐप पर दिखाई गई पहचान और वास्तविक व्यक्ति अलग हो, तो कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं:

सावधान ‼️

इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। शिकायत के बाद RAPIDO के कॉल सेंटर से उपभोक्ता को फोन किया गया और कंपनी की ओर से इसे “असुविधा” बताते हुए पहले माफी मांगी गई। लेकिन जब उपभोक्ता ने सवाल उठाया कि आखिर किसी दूसरे व्यक्ति की ID का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, तो ग्राहक सेवा प्रतिनिधि ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बाद उपभोक्ता ने पूछा कि यदि कंपनी के पास पहले से ऐसी शिकायतें हैं, तो फिर इस तरह के मामलों को रोकने के लिए अब तक कोई पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। उपभोक्ता ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से यह जानने की मांग भी की कि फर्जी या उधार ली गई IDs के इस्तेमाल को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन अगले दिन तक भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि करोड़ों उपभोक्ताओं से कारोबार करने वाली बड़ी टेक कंपनियां पहचान सत्यापन और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर पर्याप्त गंभीर हैं या नहीं। यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान संबंधी खामियां मौजूद हैं, तो क्या उनका दुरुपयोग असामाजिक या आपराधिक तत्व कर सकते हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित कंपनी और जांच एजेंसियों के स्तर पर स्पष्ट होना आवश्यक है।

  • क्या प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत आईडी किसी और द्वारा इस्तेमाल की जा रही है?
  • क्या पहचान सत्यापन (KYC) पर्याप्त है?
  • यदि कोई आपराधिक घटना हो जाए, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
  • महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

ऐप पर एक नाम, मौके पर दूसरा व्यक्ति?

PUBLIC FIRST को उपलब्ध कुछ स्क्रीनशॉट और शिकायत रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि एक मामले में ऐप पर एक व्यक्ति का नाम दिखाई दिया, जबकि मौके पर कोई अन्य व्यक्ति पहुंचा। संबंधित प्लेटफॉर्म से इसकी शिकायत भी की गई और मामले को जांच के लिए आगे बढ़ाने की बात कही गई।

हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इस विशेष मामले में किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई अपराध सिद्ध नहीं हुआ है और न ही इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या संस्थान पर आरोप लगाना है। सवाल केवल सिस्टम और सत्यापन प्रक्रिया पर है।

क्या यह बड़ा नेटवर्क हो सकता है?

देश के विभिन्न शहरों में समय-समय पर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ लोग दूसरे की आईडी, अकाउंट या प्रोफाइल का उपयोग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह सुरक्षा, जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

साइबर और उपभोक्ता सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • प्लेटफॉर्म को रियल-टाइम फेस वेरिफिकेशन सिस्टम अपनाना चाहिए।
  • समय-समय पर KYC का पुनः सत्यापन होना चाहिए।
  • ग्राहकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी जांच जरूरी है।
  • यदि किसी और की आईडी का उपयोग पाया जाता है, तो अकाउंट तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।

PUBLIC FIRST के सवाल

  • ऐप पर एक नाम और मौके पर दूसरा व्यक्ति क्यों?
  • क्या प्लेटफॉर्म की KYC प्रक्रिया में खामियां हैं?
  • यात्रियों और ग्राहकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
  • क्या फर्जी आईडी के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई होगी?
  • क्या नियामक एजेंसियों को इस पर व्यापक जांच करनी चाहिए?

तकनीक पर आधारित सेवाओं का विस्तार स्वागतयोग्य है, लेकिन भरोसे की बुनियाद पहचान की सत्यता पर टिकी होती है। यदि डिजिटल पहचान और वास्तविक व्यक्ति में अंतर पाया जाता है, तो यह केवल एक उपभोक्ता शिकायत नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन जाता है।

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