मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज राजधानी भोपाल में जलगंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का स्थल निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि,

“जल ही जीवन है और हमारी सांस्कृतिक धरोहरें ही हमारे भविष्य की दिशा तय करती हैं। सरकार जल स्रोतों के संरक्षण, पुनरुद्धार और संवर्धन के लिए कृतसंकल्पित है।”

पुरानी बावड़ी, जो कभी शहर के मुख्य जल स्रोतों में से एक थी, आज जलगंगा अभियान के अंतर्गत पुनः जीवंत की जा रही है। इस बावड़ी के पुनरुद्धार से न केवल पारंपरिक जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आसपास के नागरिकों को भी स्थायी जल सुविधा उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने संवर्धन कार्यों की प्रगति की जानकारी अधिकारियों से ली और कहा कि विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता और पारंपरिक वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि जलगंगा अभियान केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

मुख्य उद्देश्य इस निरीक्षण का:

  • पारंपरिक जल स्रोतों के महत्व को पुनर्स्थापित करना
  • जन-जागरूकता बढ़ाना
  • स्थानीय धरोहरों का संवर्धन करना
  • वर्षा जल संग्रहण एवं पुनर्भरण को बढ़ावा देना

इस अभियान के माध्यम से सरकार ने कई अन्य पारंपरिक जल स्रोतों को भी पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना की और आभार व्यक्त किया।

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