पब्लिक फर्स्ट। रायसेन। संजीव ठाकुर।

HIGHLIGHT

  • बच्चों के भोजन में कीड़े निकलना
  • जली हुई रोटियाँ, पतली दाल
  • कम पोषण, निर्धारित मीनू की अनदेखी
  • भोजन की गुणवत्ता की कोई स्पष्ट जांच व्यवस्था नहीं

“सरकारी रिकॉर्ड्स में बच्चों को पोषक, ताजा और स्वादिष्ट मिड-डे मील परोसे जाने के दावे… मगर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।”

रायसेन जिले के ग्राम गुलगांव के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील की हालत किसी से छुपी नहीं है। जहां यह योजना बच्चों को पोषण देने और उन्हें स्कूल तक लाने का माध्यम होनी चाहिए, वहीं ज़मीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है।

शिक्षिका के दावे बनाम हकीकत

प्रभारी शिक्षिका ने बताया कि बच्चों को वही खाना दिया जाता है, जो वे अपने बच्चों को घर पर देती हैं। उनका दावा है, “अगर रोटी पर एक भी दाग हो, तो वह रोटी वापस कर दी जाती है।”

छात्र की जुबानी सच्चाई

“कई बार चावल में कीड़े निकलते हैं, रोटियाँ जली हुई मिलती हैं और दाल तो इतनी पतली होती है जैसे सिर्फ पानी हो। ऊपर से मीनू में जो लिखा होता है, वैसा खाना कभी-कभार ही मिलता है।”

ग्राउंड रिपोर्ट का अंत सवाल के साथ:

“अब देखना यह है कि क्या अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे या फिर बच्चों की थालियों में यूं ही परोसे जाते रहेंगे कीड़े, जली रोटियाँ और पानी जैसी दाल?”

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