भादव मास के प्रथम सोमवार को उज्जैन में राजाधिराज बाबा महाकाल की पांचवी राजसी सवारी निकाली गई, जिसमें पूरे नगर में देव भक्ति और राष्ट्र भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से आरंभ हुई यह भव्य सवारी शहर के प्रमुख मार्गों से होकर शिप्रा नदी स्थित रामघाट पहुंची। रामघाट पर जल अभिषेक के बाद सवारी पुनः मंदिर परिसर में पहुंचकर सम्पन्न हुई।
राजा के रूप में बाबा महाकाल के दर्शन
बाबा महाकाल इस सवारी में होलकर स्वरूप में निकले और प्रजा को दर्शन दिए। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुलिस बैंड और हाथों में तिरंगा लिए जवानों की उपस्थिति ने माहौल को राष्ट्र प्रेम के रंग में रंग दिया।
राज्य मंत्री कृष्णा गौर और उज्जैन जिले के प्रभारी गौतम टेटवाल भी सवारी में शामिल रहे।
सवारी का आठ किलोमीटर लंबा मार्ग
सवारी का लगभग 8 किलोमीटर लंबा मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती, सत्यनारायण मंदिर, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होकर गुजरा।
धार्मिक पर्यटन की भव्य झांकियां
सवारी में शामिल झांकियों में मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की अद्भुत झलक दिखाई दी —
- राजाराम लोक, ओरछा
- सर्वसिद्धि मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा
- मां शारदा शक्तिपीठ, मैहर
- देवलोक मां श्री बिजासनधाम, सलकनपुर
भक्तों के लिए लाइव प्रसारण
मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं के लिए चलित रथ पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण किया। यह प्रसारण उज्जैन के फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्त अखाड़ा सहित कई प्रमुख स्थानों पर उपलब्ध रहा, जिससे हजारों श्रद्धालु सवारी के दर्शन का लाभ ले सके।
उत्सव का सार
उज्जैन की ऐतिहासिक महाकाल सवारी इस बार सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि देशभक्ति के रंगों में भी रंगी नजर आई। बाबा महाकाल के भव्य स्वरूप, पुलिस जवानों की तिरंगा सलामी, धार्मिक झांकियां और जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे नगर को एकता और उत्सव की भावना से भर दिया।
