पब्लिक फर्स्ट। उज्जैन। अमृत बैंडवाल ।
श्रावण मास के अंतिम और चौथे सोमवार को उज्जैन की पवित्र नगरी में बाबा महाकाल की राजसी सवारी पारंपरिक वैभव और भक्ति भाव के साथ निकाली गई। बाबा महाकाल ने राजा के स्वरूप में नगर भ्रमण करते हुए अपने भक्तों को दर्शन दिए।
शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई सवारी में भगवान शिव तांडव रूप में चांदी की पालकी में विराजमान थे। सवारी में पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर, पुलिस बैंड, घोड़े, भजन मंडलियां और झांझ-डमरू दल जैसे पारंपरिक दल भी सम्मिलित थे, जिन्होंने इस भव्य आयोजन को और भी मनोहारी बना दिया।
बाबा की यह शाही सवारी 8 किलोमीटर के मार्ग से होकर गुज़री, जिसमें महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, रामघाट, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, गोपाल मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल रहे। रामघाट पर शिप्रा नदी से बाबा का पूजन-अभिषेक भी किया गया।
मुख्यमंत्री की विशेष इच्छा के तहत इस बार सवारी में आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की सुंदर झांकियां भी सवारी का हिस्सा बनीं।
स्कूली शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस ऐतिहासिक आयोजन में सम्मिलित हुए और जनसहभागिता को सराहा। श्रद्धालु भक्तों ने राजाधिराज महाकाल के दर्शन के लिए घंटों इंतजार किया और पूरे मार्ग पर ‘हर हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को संजोने वाला भव्य प्रतीक भी है।
