जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास विभाग (JKPDD) के एक और लाइनमैन की ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत ने पूरे विभाग और कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ा दी है। अनंतनाग जिले के मोंगहॉल क्षेत्र में कार्यस्थल पर हुए एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लाइनमैन अब हामिद मीर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

इस दुखद घटना पर जम्मू-कश्मीर विद्युत कर्मचारी संघ (JKEU) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं प्रकट की हैं। संघ ने इसे विभागीय फील्ड स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच और तत्काल सुधारात्मक कदमों की मांग की है।

जेकेईयू की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “हालांकि शब्द इस अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं कर सकते, लेकिन जेकेपीडीडी के सभी कर्मचारी इस दुख की घड़ी में दिवंगत अब हामिद मीर के परिवार के साथ खड़े हैं और अपनी सच्ची संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।”

संघ ने कहा कि फील्ड में कार्यरत कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर जनता, अस्पतालों और अन्य आवश्यक संस्थानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चालू विद्युत प्रणालियों के साथ काम करना अत्यंत जोखिम भरा है, जिसके बावजूद कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और बीमा व्यवस्था अब तक लागू नहीं की गई है।

जेकेईयू ने सरकार और विभाग से जेकेपीडीडी के सभी कर्मचारियों के लिए एक व्यापक बीमा योजना लागू करने की पुरजोर मांग की। साथ ही, बिजली ढांचे में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने और प्रणालीगत सुधार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संघ ने अब हामिद मीर की मौत की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए यह भी कहा कि उनके तबादले के अनुरोधों को नजरअंदाज किया गया, जिससे उन पर अनावश्यक मानसिक और कार्यात्मक दबाव पड़ा। जेकेईयू ने मृतक के परिवार को पूर्ण मुआवजा देने और एसआरओ-43 के तहत एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।

इस संबंध में जेकेईयू ने जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रबंध निदेशक केपीडीसीएल, मुख्य अभियंता केपीडीसीएल और अधीक्षण अभियंता सर्कल बिजबेहरा को प्रतिलिपि भी भेजी है।

ड्यूटी के दौरान एक और कर्मचारी की जान जाना न सिर्फ विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर कब तक फील्ड स्टाफ बिना पर्याप्त सुरक्षा के अपनी जान जोखिम में डालता रहेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए ठोस कदम कब उठाता है।

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