उज्जैन जिले के माकड़ोन क्षेत्र में डैम के पानी के बंटवारे को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया है। पैतीसा डेम के पानी को लेकर माकड़ोन और डेलची गांव के किसानों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सड़क पर उतर आया। इसी विवाद के चलते माकड़ोन के किसानों ने मंडी परिसर के मुख्य गेट के सामने करीब तीन घंटे तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

किसानों का आरोप है कि डेलची गांव के कुछ लोगों ने रात के समय जानबूझकर सिंचाई के लिए बिछाई गई पाइपलाइन और मोटर को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद करीब 35 किसानों की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा और किसानों को हजारों रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका आरोप है कि हर साल डेलची गांव के कुछ किसान पानी को लेकर मनमानी करते हैं और नियमों की अनदेखी करते हुए डैम के पानी पर कब्जा कर लेते हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोग कानून से नहीं डरते और बार-बार विवाद की स्थिति पैदा करते हैं।

आक्रोशित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पाइपलाइन और मोटर को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही किसानों ने पैतीसा डेम के पानी का स्थायी और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा न हों।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच विवाद को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की समस्या को ध्यान में रखते हुए पानी के बंटवारे को लेकर स्थायी समाधान निकालने पर विचार किया जा रहा है।

माकड़ोन का यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई जल के बंटवारे से जुड़े बढ़ते विवादों की ओर भी इशारा करता है। किसानों का कहना है कि समय रहते यदि प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, तो ऐसे विवाद आगे और गंभीर रूप ले सकते हैं।

फिलहाल, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक पहल के बाद किसान शांत हुए हैं, लेकिन स्थायी समाधान की मांग अब भी बनी हुई है।

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