जो लोग सालों तक कहते रहे कि भोपाल में मेट्रो सिर्फ काग़ज़ों में रहेगी,
आज उन्हीं सवालों पर विकास की सीधी चोट पड़ी है।

भोपाल मेट्रो—
सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं,
बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहरी विज़न और
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ग्राउंड डिलीवरी का सबूत है।

मंत्री विश्वास सारंग ने साफ शब्दों में कहा—
ये सौगात सिर्फ भोपाल की नहीं,
पूरे मध्यप्रदेश के बदलते शहरी चेहरे की पहचान है।

जहां विपक्ष ने शंका फैलाई,
वहां सरकार ने स्टेशन खड़े कर दिए।
जहां राजनीति हुई,
वहां ट्रेन दौड़ने लगी।

स्वच्छता से रोजगार,
रोजगार से अधोसंरचना—
और अधोसंरचना से आत्मनिर्भर शहर।

भोपाल मेट्रो
अब वादा नहीं…
चलती हुई हकीकत है।

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