22 दिसंबर को खगोलीय दृष्टि से वर्ष का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होगी। इस अवसर पर उज्जैन के जीवाजीगंज वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष देखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। शंकु यंत्र के माध्यम से सूर्य की छाया की लंबाई का अवलोकन किया जा सकता है, जो पूरे दिन मकर रेखा पर लंबवत दृष्टिगोचर होती है।

इस वर्ष 22 दिसंबर को उज्जैन में सूर्योदय सुबह 7:05 बजे और सूर्यास्त शाम 5:46 बजे होगा। इससे दिन की कुल अवधि 10 घंटे 41 मिनट और रात की कुल अवधि 13 घंटे 19 मिनट रहेगी। खगोलीय दृष्टि से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सूर्य मकर रेखा पर लंबवत होगा। सूर्य की इस स्थिति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में इस दिन दिन सबसे छोटा और रात सबसे लंबी होती है।

जीवाजीगंज वेधशाला में इस अवसर को देखने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं और पर्यटकों की बड़ी संख्या जुटी। वेधशाला के अधिकारी और कर्मचारी शंकु यंत्र के माध्यम से लोगों को सूर्य की छाया और मकर रेखा पर सूर्य की स्थिति के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

वेधशाला के टेक्निकल अधिकारी दीपक गुप्त ने बताया कि शंकु यंत्र से प्रत्यक्ष देखे जाने पर सूर्य की छाया पूरे दिन सबसे लंबी होती है और मकर रेखा पर गमन करती दृष्टिगोचर होती है। इस दिन सूर्य की गति दक्षिण की ओर होने के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं।

22 दिसंबर के बाद सूर्य की गति उत्तर की ओर दृष्टिगोचर होने लगती है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप अब उत्तरी गोलार्द्ध में दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी होती हैं। सूर्य 21 मार्च को विषुवत रेखा पर लंबवत होगा, तब दिन और रात की अवधि लगभग बराबर हो जाएगी।

पर्यटकों और छात्रों के लिए यह घटना न केवल खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संयोजन को समझने का भी अनूठा अवसर प्रदान करती है।

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