पन्ना जिले में धान उपार्जन एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
किसानों के लिए राहत बनकर आई सरकारी व्यवस्था अब शोषण का औजार बनती नजर आ रही है।

1 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 तक चल रहे धान उपार्जन में 41 केंद्र बनाए गए,
लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि यहां ग्रेडिंग के नाम पर खुलेआम वसूली हो रही है।

तय वजन 40 किलो 600 ग्राम…
लेकिन तौल 41 किलो से ज्यादा!

सवाल ये है कि अतिरिक्त धान गया कहां?
किसकी जेब में?

किसानों का आरोप है कि प्रति क्विंटल 40 से 50 रुपये तक जबरन वसूले जा रहे हैं,
और स्लॉट बुकिंग की अव्यवस्था ने हालात और बदतर कर दिए हैं।

हैरानी की बात ये है कि प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी सहकारिता विभाग के भ्रष्ट तंत्र की कठपुतली बना हुआ है।

आपको बता दें,
पिछले रबी सीजन में गेहूं उपार्जन के दौरान जिले की कई समितियों में
लोकायुक्त पुलिस द्वारा भारी वित्तीय धांधली उजागर की गई थी।

शाहनगर वेयरहाउस से राशन दुकानों तक अमानक अनाज सप्लाई का मामला भी सामने आया।

इसके बावजूद इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है।

कथित ग्रेडिंग की पोल तब खुली,
जब भोपाल से आए गुणवत्ता नियंत्रक ने
कई समितियों का धान अमानक करार दिया।

बड़ा सवाल यह है कि
अगर उपार्जन अमानक है
तो फिर किसानों से ग्रेडिंग शुल्क क्यों वसूला गया?

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