कश्मीर घाटी में जहां एक ओर बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और सरकार 24×7 बिजली आपूर्ति के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शोपियां जिले के कई इलाके अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नजर आ रहे हैं। शोपियां शहर से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित छत्रीपोरा इलाका इसका ताजा उदाहरण है, जहां असुरक्षित बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर स्थानीय लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है।

छत्रीपोरा इलाके में आज भी जर्जर लकड़ी के बिजली के खंभों और ढीली लटकी बिजली की तारों के सहारे बिजली सप्लाई की जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये पुराने खंभे कभी भी गिर सकते हैं, जिससे बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। इसके बावजूद पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD) की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थिति को और भी गंभीर बनाता है इलाके में मौजूद एक खुला मैदान, जहां बच्चे नियमित रूप से खेलते हैं। यही मैदान सीधे लटकी हुई बिजली की तारों के नीचे है, जिससे किसी भी वक्त कोई दर्दनाक हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश या तेज़ हवाओं के दौरान खतरा और बढ़ जाता है।

निवासियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार संबंधित PDD अधिकारियों से संपर्क कर पुराने और असुरक्षित खंभों को बदलने की मांग की, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। लोगों का कहना है कि जब पूरे कश्मीर में स्मार्ट मीटर जैसी योजनाएं लागू की जा रही हैं, तब इस तरह की बुनियादी और जानलेवा समस्याओं को नजरअंदाज किया जाना बेहद चिंताजनक है।

स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जहां सरकार स्मार्ट मीटर के ज़रिए बेहतर बिजली व्यवस्था का दावा कर रही है, वहीं कई गरीब परिवारों के लिए यह पहल आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रही है। ऐसे में पुराने और असुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर को छोड़कर केवल मीटरिंग पर ध्यान देना, जमीनी हकीकत से दूर नजर आता है।

अब छत्रीपोरा के निवासियों ने उच्च अधिकारियों और प्रशासन से अपील की है कि इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। उनकी मांग है कि इलाके में बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द अपग्रेड किया जाए, जर्जर खंभों को बदला जाए और लटकती तारों को सुरक्षित तरीके से लगाया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले हालात पर काबू पाया जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की लापरवाही पर तय होगी।

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