मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई से नागरिकों के बीमार होने और मौतों के मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। घटना के बाद राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जहां दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है, वहीं पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और मरीजों को निशुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार नगर निगम जोन क्रमांक-4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री (PHE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उपयंत्री (PHE) को सेवा से पृथक कर दिया गया है। राज्य शासन ने साफ शब्दों में कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति गठित
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि दूषित पानी की सप्लाई कैसे हुई, जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कैसे रोकी जा सकती है। समिति को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने इस दर्दनाक घटना में जान गंवाने वाले नागरिकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित मरीजों का इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाए और अस्पतालों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
दूषित पानी से मचा कोहराम
भागीरथपुरा क्षेत्र में गुरुवार से गंदे और दूषित पानी की आपूर्ति के कारण हालात तेजी से बिगड़े। जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 150 लोग बीमार हो चुके हैं, जिनमें से 70 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। बीमारों में उल्टी-दस्त, बुखार और संक्रमण के गंभीर लक्षण सामने आए हैं।
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