- इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित नल के पानी से अब तक 12 लोगों की मौत, 11–15 दिन पहले चेतावनी के बावजूद नगर निगम–PHE सोते रहे।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित नल के पानी से फैलने वाली बीमारी अब महामारी जैसी स्थिति में बदल चुकी है।
अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग उल्टी–दस्त और गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं।
यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि
पूरी तरह सिस्टम जनित अपराध (Systemic Failure) है।
स्थानीय नागरिकों ने 11 से 15 दिन पहले पानी के कड़वे स्वाद और बदबू की शिकायतें की थीं,
लेकिन नगर निगम (IMC) और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारी फाइलें पलटते रहे, ज़मीन पर नहीं उतरे।
कैसे फैला ज़हर?
• मुख्य नर्मदा पेयजल पाइपलाइन के ऊपर शौचालय और सीवर चैंबर का निर्माण
• लीकेज से सीवर का गंदा पानी सीधे नर्मदा लाइन में मिला
• खुदाई के दौरान ढीले और असुरक्षित जॉइंट्स
• वॉटर क्वालिटी टेस्टिंग सिर्फ़ काग़ज़ों में, ज़मीन पर शून्य
सवाल अब सिर्फ़ लापरवाही का नहीं,
मानव जीवन के साथ आपराधिक खिलवाड़ का है।
ज़िम्मेदारी किसकी ?
निलंबित / हटाए गए अधिकारी
• शालिग्राम सितोले – जोनल अधिकारी, IMC जोन-4
• योगेश जोशी – सहायक यंत्री, IMC
• शुभम श्रीवास्तव – प्रभारी उपयंत्री / PHE (सेवा समाप्त)
निलंबन यह स्वीकार करता है कि चूक हुई,
लेकिन क्या सिर्फ़ इन्हीं से 12 जानों का हिसाब पूरा हो जाएगा?
सवालों के घेरे में वरिष्ठ अधिकारी :
• निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव
• अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया
• नर्मदा प्रोजेक्ट इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव (13 वर्षों से एक ही पद पर)
• महापौर पुष्यमित्र भार्गव
• जल समिति प्रभारी बबलू शर्मा
विपक्ष ने FIR की मांग की
हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट तलब की
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने IAS अध्यक्षता में जांच समिति गठित की
जांच व्यवस्था भी फेल
• दैनिक जल परीक्षण — ज़मीन पर नदारद
• शिकायत निवारण तंत्र — बहरेपन का शिकार
• वार्षिक निरीक्षण — औपचारिकता मात्र
अगर यह सिस्टम काम कर रहा होता,
तो 12 शवों की गिनती नहीं करनी पड़ती।
बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ़ “लापरवाही” है
या फिर Systemic Murder by Negligence?
क्या 12 मौतों के बाद भी
जवाबदेही सिर्फ़ निलंबन तक ही सीमित रहेगी?
पब्लिक फर्स्ट सवाल उठाता रहेगा ।
जब तक सिस्टम की जवाबदेही पर अपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जायेगा – जब तक नीचे से ही नहीं बल्कि ऊपर से ज़िम्मेदारी तय नहीं की जायेगी – जब तक आम जन की मौतों के लिये प्रकरण दर्ज नहीं किये जायेंगे – तब तक निलंबन और बहाली का खेल यूँ ही चलता रहेगा । ये कोई कार्यवाही नही ये सिर्फ समय टालना है । जब तक पब्लिक की न्याय की आस ना टूट जाये ।
- सरकार कोई भी हो – जब तक सिस्टम नहीं ज़िम्मेदार बनाया जायेगा – सरकारी अफ़सरों और कर्मचारियों को जवाबदेह नहीं बनाया जायेगा – ऐसे हादसों को रोकना हमेशा की तरह ही – एक फ़ाईल बनकर रह जायेगा ।
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