इंदौर शहर में दूषित पानी की आपूर्ति से एक व्यक्ति की मौत के मामले ने प्रशासन को हिला कर रख दिया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दूषित पानी की शिकायतों को गंभीरता से न लेने और समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाने के आरोप में नगर निगम के अपर आयुक्त को इंदौर से हटा दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि उनकी लापरवाही के चलते यह गंभीर स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।

वहीं, इस पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शहर में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखना निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसके बावजूद दूषित पानी की आपूर्ति होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। आयुक्त से तय समय सीमा में विस्तृत जवाब मांगा गया है।

सूत्रों के अनुसार, दूषित पानी पीने से एक नागरिक की मौत हो गई थी, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध भी दर्ज कराया था। जांच में सामने आया कि संबंधित क्षेत्र में पानी की सप्लाई लाइन में गंदा पानी मिल रहा था, जिसकी शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन उन पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं। साथ ही, यह निर्देश दिए गए हैं कि शहर के सभी क्षेत्रों में जल आपूर्ति की तत्काल जांच कराई जाए और कहीं भी दूषित पानी पाए जाने पर तुरंत सप्लाई बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

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