मध्यप्रदेश के इंदौर नगर निगम के बजट सत्र से जुड़ा एक विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब कांग्रेस के अंदरूनी हालात और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहा है।

दरअसल, बजट सत्र के दौरान परंपरा के अनुसार ‘वंदे मातरम’ गाया जाना था, लेकिन कांग्रेस पार्षद फउजिआ शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने इसे गाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सदन में माहौल गरमा गया और विवाद बढ़ता चला गया।

मामला तब और तूल पकड़ गया, जब मीडिया के सामने रुबीना इकबाल ने बयान देते हुए कहा—
“कांग्रेस पार्टी भाड़ में जाए… कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों के वोट लेने के लिए है।”

इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब सवाल सिर्फ राष्ट्रगीत के सम्मान का नहीं, बल्कि पार्टी की विचारधारा, अनुशासन और आंतरिक स्थिति का बन गया है।

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस इस तरह के बयानों को लेकर चर्चा में आई हो। इससे पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वे कथित तौर पर “पार्टी जाए तेल लेने” जैसी टिप्पणी करते नजर आए थे।

अब मौजूदा विवाद में इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष Chintu Chouksey ने रुबीना इकबाल के खिलाफ निष्कासन की सिफारिश करते हुए पत्र लिखा है। हालांकि, दो दिन बीतने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

वहीं, जब भोपाल में इस मामले को लेकर जीतू पटवारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा—
“हमें किसी से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए… और कब कार्रवाई होगी, यह बताने के लिए बाध्य नहीं हूं।”

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या कांग्रेस में अनुशासन कमजोर हो गया है?
क्या ऐसे बयान पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत हैं?
या फिर यह सिर्फ व्यक्तिगत टिप्पणी भर है?

फिलहाल, इस विवाद ने कांग्रेस की आंतरिक स्थिति और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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