HIGHLIGHTS FIRST :
- जर्जर सड़कों की मरम्मत से लेकर नए विद्युत उपकेंद्र तक—प्रभारी मंत्री के दौरे में विकास और जनसमस्याओं पर फोकस
नर्मदापुरम जिले में हाल के दिनों में सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं।
ऐसे समय में जिले के प्रभारी मंत्री और मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का प्रशासनिक दौरा विकास कार्यों की समीक्षा और जनसमस्याओं को विभागीय स्तर तक पहुंचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
नानपा-कुल्हड़ा मार्ग की बदहाली को लेकर सितंबर में ग्रामीणों ने आंदोलन किया। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 3.26 किलोमीटर लंबे मार्ग की स्थिति कई वर्षों से खराब है और बारिश के दौरान गड्ढों तथा जलभराव से आवागमन प्रभावित होता है।
- सड़क का मुद्दा बना प्रशासनिक प्राथमिकता
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि समस्या केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सड़क के स्थायी निर्माण के प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्तर पर पहले भी प्रक्रिया चली थी। ग्रामीण विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेजे जाने तथा दिसंबर 2025 में अपर मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण किए जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, भारी वाहनों और कथित अवैध रेत परिवहन के कारण नई सड़क की स्थायित्व को लेकर भी विभागीय चिंता सामने आई थी। यानी समस्या का समाधान केवल सड़क बनाने से नहीं, बल्कि सड़क को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों पर कार्रवाई से भी जुड़ा है।
ऐसे मामलों में प्रभारी मंत्री के सामने चुनौती साफ है—सड़क बने, गुणवत्ता के साथ बने और लंबे समय तक टिके।
- राकेश सिंह का फोकस—सड़क की गुणवत्ता और जवाबदेही
लोक निर्माण मंत्री के रूप में राकेश सिंह पहले भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर देते रहे हैं। जुलाई 2026 की एक विभागीय समीक्षा में उन्होंने खराब निर्माण कार्यों पर कार्रवाई, दोषी ठेकेदारों की जवाबदेही और अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी के निर्देश दिए थे।
सितंबर में भी प्रदेश के सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों के औचक निरीक्षण की व्यवस्था लागू किए जाने की जानकारी सामने आई।
इस पृष्ठभूमि में नर्मदापुरम जैसे जिले में सड़क संबंधी शिकायतों को केवल तत्काल मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान और निर्माण गुणवत्ता के नजरिये से देखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
सिर्फ सड़क नहीं, बिजली के मोर्चे पर भी काम
राकेश सिंह के नर्मदापुरम प्रवास के दौरान मालाखेड़ी के नए विद्युत उपकेंद्र के लोकार्पण का कार्यक्रम भी रखा गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नए उपकेंद्र से लगभग 7,500 उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
नर्मदापुरम में सड़क को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर समस्याएं मौजूद हैं। वहीं प्रशासन द्वारा मरम्मत की कार्रवाई शुरू किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
ऐसे में राकेश सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि तात्कालिक मरम्मत से आगे बढ़कर स्थायी सड़क समाधान की समयसीमा और गुणवत्ता सुनिश्चित कराई जाए।
नर्मदापुरम में सड़क और बिजली से जुड़े मुद्दों के बीच राकेश सिंह की भूमिका समीक्षा, समन्वय और जवाबदेही तय करने वाले मंत्री की है। उनके विभागीय रिकॉर्ड में निर्माण गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिखाई देता है।
अब चुनौती है कि नानपा-कुल्हड़ा जैसे ग्रामीण मार्गों की समस्या को स्थायी समाधान मिले और नए बिजली ढांचे का लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
यानी नर्मदापुरम में मुद्दा सिर्फ विकास की घोषणा का नहीं—बल्कि विकास को जमीन पर उतारने का है। और इसी कसौटी पर प्रभारी मंत्री राकेश सिंह की सक्रियता का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा।
PUBLICFIRSTNEWS.COM
