उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में बेतवा नदी पर अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम नदी की जलधारा के बीच खनन कर रहे हैं, जबकि इस पर हाईकोर्ट और NGT के स्पष्ट निर्देश हैं।

मामला हिमनपुरा स्थित मोरंग खदान, खंड संख्या 04 का बताया जा रहा है, जहां दबंगों द्वारा बड़ी बूम वाली पोकलैंड मशीनों से दिन-रात खनन किया जा रहा है। आरोप है कि यह खनन तय सीमा से बाहर और निजी जमीनों तक फैल चुका है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, खनन माफिया नदी की मुख्य धारा में ही बेखौफ खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण और जल प्रवाह पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

इस पूरे मामले में खनिज विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद माफिया तंत्र पर कोई असर नहीं पड़ रहा और वे लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

चर्चाओं में एक नाम कोमल यादव का भी सामने आ रहा है, जिस पर संरक्षण मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सिस्टम दबाव में नजर आ रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इससे साफ है कि अवैध खनन के खिलाफ सख्त कदम उठाने में प्रशासन पीछे हटता दिख रहा है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या बेतवा नदी में चल रहे इस अवैध खनन पर रोक लग पाती है या नहीं।

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