जिले के कारी कस्बे में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमराई हुई है। नलों से गंदा, बदबूदार और संदिग्ध पानी आ रहा है, जिसे स्थानीय वार्डवासी पीने के अलावा रोजमर्रा के कामों के लिए भी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कई दिनों से पानी काला और मटमैला दिखाई दे रहा है और बदबूदार है, जिससे स्वास्थ्य के गंभीर खतरे की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया:
— वार्ड निवासियों एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष ने कहा है कि पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।
— लोगों ने प्रशासन से तुरंत पानी की जांच, साफ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था, तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की अनदेखी पर सवाल:
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायत के बाद सीएम हेल्पलाइन पर डाली गई रिपोर्ट के आधार पर जांच टीम तो पहुंची, लेकिन औपचारिक निरीक्षण के बाद लौट गई और समस्या का कोई समाधान नहीं निकला।
यह मुद्दा ऐसे समय में सुर्खियों में है जब प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुए स्वास्थ्य संकट और मौतों का राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित हुआ है — जहाँ ड्रेनेज पानी के पेयजल नेटवर्क में सम्मिलन के कारण कम से कम 10 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग बीमार पड़े हैं, और राज्य सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की नोटिस का सामना करना पड़ा है।
स्थानीय लोगों का सवाल यही है कि कारी जैसे छोटे कस्बे में भी वही समस्या क्यों बनी हुई है, जहाँ तक मुख्यमंत्री कार्यालय/नगर परिषद तक बार-बार शिकायत पहुँचाने के बाद भी स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई।
स्थानीय मांगें:
✔ तुरंत जल गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट जारी हो
✔ शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व ट्रैयल आपूर्ति की व्यवस्था शुरू हो
✔ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई हो
करी कस्बा टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से मात्र लगभग 10 किमी दूर है, लेकिन यहाँ अभी तक मूलभूत पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस प्रकार की गुणवत्ता की शिकायतें सामने आ रही हैं, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्वास्थ्य संकट गंभीर रूप ले सकता है।
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