मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आय में वृद्धि के लिए 2026 वर्ष को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में घोषित करने की घोषणा की है। इससे पहले सरकार ने 2024 को ‘नारी वर्ष’ और 2025 को ‘उद्योग-रोजगार वर्ष’ के रूप में मनाया था। 2026 में प्रदेश सरकार का विशेष फोकस कृषि, किसान हित और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा।
किसानों के प्राकृतिक उत्पाद आम जन तक पहुंचाने का निर्णय
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने निर्णय लिया है कि हर जिले में स्टाल्स के माध्यम से किसानों के प्राकृतिक उत्पाद आम जनता तक उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे कृषि उत्पादकों को सीधे बाजार में अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और उपभोक्ताओं को स्वस्थ व प्राकृतिक उत्पाद सुलभ दामों पर मिलेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन और अनुदान भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे जैविक/प्राकृतिक कृषि को अपनाना और उसे बढ़ावा देना संभव हो सके। इससे कृषि उत्पादन में नई तकनीकों का प्रयोग बढ़ेगा और किसान की आय में सुधार होगा।
राज्य सरकार की अन्य तैयारियाँ और योजनाएँ
डॉ. मोहन यादव ने बताया कि 2026 किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि क्षेत्र के हित में व्यापक कार्ययोजनाएँ, विशेषज्ञों की सहभागिता और कृषि से जुड़ी सभी हितधारकों के साथ सहयोगात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे कृषि से जुड़े नवाचार, विपणन और रोजगार के अवसरों को और सुदृढ़ किया जाएगा।
सरकार के कार्यक्रम के अनुसार इस वर्ष में
- प्रदेश स्तर पर किसान सम्मेलन और धान महोत्सव जैसे आयोजन होंगे,
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी,
- और कृषि उपज निर्यात प्रोत्साहन व क्रेडिट लिंक कार्यशालाएँ संचालित की जाएंगी।
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