मध्यप्रदेश के कायस्थ समाज की अग्रणी संस्था कायस्थम मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित कायस्थम–2026 समारोह कला, संस्कृति और प्रतिभा के संगम के रूप में यादगार बन गया। यह एक दिवसीय भव्य आयोजन समाज की सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक परंपरा और समकालीन प्रतिभाओं के सम्मान का उत्सव बनकर सामने आया। कार्यक्रम में समाज के विभूतियों को मंच पर सम्मानित किया गया, जबकि कला और भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने सभागार को सौंदर्य और भावनाओं से भर दिया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वास सारंग, खेल एवं युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री रहे। विशिष्ट अतिथियों में स्वामी चक्रपाणि महाराज (चित्रगुप्त अखाड़ा न्यास, मथुरा), ब्राह्मचारी गिरीश जी (महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय), और टीवी/फिल्म कलाकार तितिक्षा श्रीवास्तव, सोनिया श्रीवास्तव, शोभिता श्रीवास्तव शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने की।

कायस्थम के अध्यक्ष प्रलय श्रीवास्तव ने आयोजन की रूपरेखा और उद्देश्य बताते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य प्रतिभाओं को सम्मान और जरूरतमंदों को सहयोग देना है। उन्होंने युवा चित्रांश को कायस्थम से जोड़ने, देहदान और अंगदान जैसी सामाजिक जागरूकता बढ़ाने तथा नशा मुक्त जीवन की ओर युवाओं को प्रेरित करने की योजना साझा की।

समारोह का शुभारंभ गणेश वंदना और श्री चित्रगुप्त वंदना से हुआ, जिसके बाद वैदिका खरे की कविता ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। राष्ट्रीय स्तर की कथक नृत्यांगना शालू श्रीवास्तव की कथक प्रस्तुति और ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ विषय पर आधारित सांगीतिक प्रस्तुति से सामाजिक चेतना का संदेश दिया गया। भोपाल की कथक नृत्यांगना गार्गी श्रीवास्तव ने शिव महिमा पर आधारित नृत्य से सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में 13 श्रेणियों में 15 विशिष्ट प्रतिभाओं को कायस्थम–2026 सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में शामिल थे: रामशंकर खरे, राकेश श्रीवास्तव, कर्नल राजीव सक्सेना, डॉ. योगेश वर्मा, पंकज श्रीवास्तव, डॉ. नेहा माथुर और अन्य। इसके अलावा कायस्थम की पत्रिका ‘कायस्थ दर्पण’ का विशेषांक, भगवान श्री चित्रगुप्त 2026 कैलेंडर और श्री चित्रगुप्त चालीसा का विमोचन भी किया गया।

स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा कि कायस्थ समाज राष्ट्र के लिए जीने वाली परंपरा का वाहक रहा है और रिश्तों में मधुरता और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। विश्वास सारंग ने हिंदू समाज की बुद्धि कायस्थ बताते हुए कहा कि अधिकार और कर्तव्य दोनों निभाने होंगे, युवाओं को आगे लाना होगा और संस्कृति को बचाना हमारी प्राथमिकता है। ब्राह्मचारी गिरीश जी ने आदर्श जीवन की स्थापना और समाज सेवा के लिए सक्रिय कदम उठाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कला और संस्कृति की झलकियों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी उजागर हुई। कथक, संगीत, नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा की प्रस्तुतियों ने समारोह को मनोहारी बना दिया। कार्यक्रम ने युवा सशक्तिकरण, प्रतिभाओं का सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी उजागर किया।

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