भारत आज जिस गति और संकल्प के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, वह देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे ज़मीन पर उतारने का कार्य किया है। देश के हर कोने में सड़कों, पुलों, रेलवे, बंदरगाहों और शहरी ढांचे का तेज़ी से विस्तार हो रहा है, जिससे आम नागरिक के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव महसूस किया जा सकता है। यह दौर ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत फिर से किसी स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर हो रहा हो, जिसकी तुलना लोग ऐतिहासिक विक्रमादित्य काल से करने लगे हैं।
इस विकास यात्रा में माननीय नितिन गडकरी जी की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से उन्होंने देश में आधुनिक पुलों, एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क को नई पहचान दी है। मुंबई जैसे महानगरों में बने अत्याधुनिक पुल न केवल ट्रैफिक की समस्या को कम कर रहे हैं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी दक्षता का भी प्रमाण हैं। यही नहीं, ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने वाले मार्गों ने आर्थिक गतिविधियों और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
भारतीय संस्कृति और परंपरा में विकास की तुलना अक्सर पौराणिक कथाओं से की जाती है। रामायण में नल-नील द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण की कथा आस्था और संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। आज का भारत उस आस्था को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ा रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह कार्य आधुनिक इंजीनियरिंग, पारदर्शी नीतियों और समयबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से हो रहा है। कुल मिलाकर, मोदी सरकार के नेतृत्व में चल रहा यह विकास अभियान नए भारत की सोच, आत्मनिर्भरता और भविष्य के प्रति मजबूत विश्वास को दर्शाता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त आधार तैयार कर रहा है।
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