प्रयागराज में चल रहे माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज पूरे श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु प्रयागराज के संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े हैं। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे से ही मौनी अमावस्या का स्नान प्रारंभ हो गया, जिसके साथ ही पूरा मेला क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

प्रशासन के अनुसार मौनी अमावस्या के इस महापर्व पर तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम पहुंचने का अनुमान है। स्नान पर्व को लेकर श्रद्धालुओं का सैलाब शनिवार से ही संगम, झूंसी और आसपास के सभी घाटों पर दिखाई देने लगा था। देर रात से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपने क्रम का इंतजार करते रहे।

व्यापक और सुदृढ़ इंतजाम

मौनी अमावस्या के स्नान पर्व को देखते हुए मेला प्रशासन ने अभूतपूर्व तैयारियां की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबा स्नान घाट विकसित किया गया है, ताकि भीड़ का दबाव एक स्थान पर न पड़े और स्नान सुचारु रूप से संपन्न हो सके।

इसके साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस, पीएसी, एनडीआरएफ और स्वयंसेवी संगठनों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

श्रद्धा, सेवा और अनुशासन का संगम

स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं और यातायात व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं, वहीं प्रशासन लगातार भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।

मौनी अमावस्या के इस महापर्व ने एक बार फिर प्रयागराज को आस्था, अनुशासन और सेवा के संगम के रूप में स्थापित कर दिया है।

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