प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना सामाजिक सरोकार से जुड़ी एक सराहनीय पहल मानी जा रही है। इसी क्रम में रायसेन जिले में आयोजित सामूहिक विवाह/निकाह कार्यक्रम में कुल 92 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे, जिनमें 35 जोड़ों का विवाह और 57 जोड़ों का निकाह संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्री यशवंत मीणा द्वारा कन्यापूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। योजना के तहत सभी नवविवाहित जोड़ों को डीबीटी के माध्यम से 49-49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई।
गरीब परिवारों के लिए वरदान: जनप्रतिनिधि
इस अवसर पर विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि अब बेटियों के जन्म को बोझ नहीं, बल्कि खुशी के रूप में देखा जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी नवदंपतियों को आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं।
लेकिन ज़मीनी हकीकत पर उठे सवाल
हालांकि योजना की मंशा सराहनीय है, लेकिन आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी खड़े हुए। कार्यक्रम के नाम पर लाखों रुपये के बिल तैयार किए जाते हैं, लेकिन कई जगहों पर पानी, बैठक व्यवस्था, टेंट, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक नहीं रहीं।
कुछ स्थानों पर अव्यवस्था देखने को मिली, तो कहीं जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद नजर आए। आयोजन से जुड़ी खर्च की फाइलें लंबी हैं, लेकिन ज़मीनी हालात यह सवाल खड़ा करते हैं कि— वास्तविक खर्च और सुविधा के बीच तालमेल क्यों नहीं दिखता?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब योजना इतनी अच्छी है, तो क्रियान्वयन में लापरवाही क्यों? क्या सामाजिक योजनाएं केवल फोटो सेशन और फाइलों तक ही सीमित रह गई हैं? यदि प्रशासन समय रहते व्यवस्थाओं पर ध्यान दे और निगरानी मजबूत हो, तो यह योजना वास्तव में समाज के लिए एक मिसाल बन सकती है।
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