मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तराखंड प्रवास के दौरान पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर योग, संस्कार और साधना से परिपूर्ण वातावरण ने सभी को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कन्या गुरुकुल के वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ का संस्कार, साधना और आत्मबल से भरा परिवेश मन को अपार शांति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज भारत की प्राचीन परंपरा से निकलकर एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सरल, सहज और संस्कारवान व्यक्तित्व विशेष रूप से देखने को मिला।

यज्ञ वेदी में बैठने से पूर्व, मुख्यमंत्री के लिए जो आसन बिछाया गया था, उसे उन्होंने सम्मानपूर्वक योगगुरु बाबा रामदेव को समर्पित कर दिया और स्वयं बिना आसन के ज़मीन पर बैठ गए। यह दृश्य उनके संस्कार, सादगी और गुरुजनों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योगगुरु स्वामी रामदेव को भारतीय योग संस्कृति के प्रसार में “भागीरथ” की संज्ञा देते हुए कहा कि योग भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित और स्वस्थ बनाने का प्रभावी माध्यम है।


हरिद्वार की इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आचरण, विचार और व्यवहार उनके व्यक्तित्व की सच्ची झलक प्रस्तुत करता है—जहाँ नेतृत्व के साथ विनम्रता और संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।

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