उज्जैन, 7 जून — भारत सरकार के शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शनिवार को अपने पारिवारिक प्रवास पर उज्जैन पहुंचे, जहाँ उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलसुबह होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लेकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह अनुभव न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष था, बल्कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है।
धर्मेंद्र प्रधान अपनी पत्नी और पुत्र के साथ मंदिर पहुँचे और पारंपरिक धोती और सोले के परिधान में शिव आराधना करते दिखाई दिए। आरती से पूर्व उन्होंने भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक—दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से—किया गया पूजन देखा और उसमें मन लगाकर भागीदारी की। भस्म आरती पूर्ण होने के बाद जब मंदिर में आकर्षक श्रृंगार के साथ भगवान महाकाल की झांकी सजाई गई, तब प्रधान और उनका परिवार नदी के पास बैठकर उस दिव्य दर्शन का आनंद लेता रहा।
पूजन-अर्चन के उपरांत धर्मेंद्र प्रधान ने भगवान शिव और नंदी को जल अर्पित किया और देश में सुख, शांति, समृद्धि और विकास के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर मंदिर के पुजारी जितेंद्र शर्मा ने विधिवत पूजा सम्पन्न कराई। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से आशीष दुबे और अभिषेक शर्मा ने मंत्री का स्वागत कर उन्हें मंदिर की स्मृति-चिन्ह भेंट की।
धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में इस अनुभव को “जीवन का अविस्मरणीय क्षण” बताया और कहा कि महाकाल की नगरी में आकर उन्हें गहरी आत्मिक शांति का अनुभव हुआ है। उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्थाओं और अध्यात्मिक ऊर्जा की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताया।
इस पावन यात्रा के माध्यम से धर्मेंद्र प्रधान ने न केवल श्रद्धा का उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि देश के शीर्ष स्तर पर बैठे जनप्रतिनिधियों की आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहने की संस्कृति को भी सामने रखा।
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