जालौन जनपद में कानून पूरी तरह बौना साबित हो रहा है और खनन माफिया सत्ता से भी ऊपर नजर आ रहा है। हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि अब किसानों की निजी जमीन भी सुरक्षित नहीं रही। जालौन जनपद के हिमनपुरा खंड संख्या–1 में खुलेआम अवैध मोरंग खनन चल रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

आरोप है कि खनन माफिया अंकित गुप्ता बेखौफ होकर किसानों की निजी भूमि और बेतवा नदी का सीना छलनी कर रहा है। रात-दिन भारी मशीनें गरज रही हैं और लाल सोना निकालकर सरकारी नियमों का खुलेआम कत्ल किया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली और खतरनाक बात यह है कि इस पूरे अवैध खेल के पीछे खनिज विभाग का कथित संरक्षण बताया जा रहा है। जिन अधिकारियों पर खनन रोकने की जिम्मेदारी है, वही माफिया के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। नियम-कानून फाइलों में कैद हैं और जमीन पर माफिया का राज चल रहा है।

ओवरलोड ट्रकों से मोरंग की ढुलाई गांवों के लिए मौत का फरमान बन चुकी है। सड़कों पर दौड़ते ये ट्रक कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं। खेत गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं, किसानों की सालों की मेहनत पलभर में बर्बाद की जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत करने वालों को दबाया जाता है, आवाज उठाने वालों को डराया जाता है। सवाल यह है कि क्या जालौन में खनन माफिया कानून से ऊपर हो चुका है? क्या खनिज विभाग माफिया का साझेदार बन गया है?

अब बड़ा सवाल यही है—खनिज विभाग कब जागेगा? अवैध खनन पर कब चलेगा बुलडोजर? या फिर यूं ही माफिया के आगे झुककर किसानों की जमीन और नदियों को खत्म होने दिया जाएगा?

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