मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल स्थित कुशाभाव ठाकरे सभागार में आयोजित डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का दीप प्रज्वलन कर गरिमामय शुभारंभ किया। यह आयोजन भारतीय इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारधारा को समर्पित रहा, जिसमें देशभर से विद्वान, शोधकर्ता, कलाकार और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभागार में लगाई गई विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें भारतीय सभ्यता, कला, संस्कृति और डॉ. वाकणकर के योगदान को दर्शाया गया था। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने भारतीय शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण किया। यह दृश्य भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता रहा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी जीवंत पहचान है। कला, शिल्प और परंपराएँ समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं और इन्हें संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का जीवन और कार्य भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का अमूल्य अध्याय है।
डॉ. मोहन यादव ने डॉ. वाकणकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल विश्वप्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद ही नहीं थे, बल्कि विचारों के प्रति अडिग और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व के प्रतीक भी थे। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आपातकाल के कठिन दौर में भी डॉ. वाकणकर ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और आरएसएस की टोपी पहनकर पद्मश्री सम्मान ग्रहण कर अपने विचारों के प्रति दृढ़ता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके कार्य हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश देते हैं। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से उनके विचारों, शोध और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है।
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