DISCLAIMER:
यह लेख किसी धर्म, समुदाय या व्यक्ति के विरुद्ध घृणा या हिंसा का आह्वान नहीं करता। इसमें व्यक्त विचार सामाजिक-ऐतिहासिक घटनाओं, सार्वजनिक तथ्यों और चेतना-दर्शन के संदर्भ में रखे गए विश्लेषण हैं। उद्देश्य केवल विचार, विवेक और आत्मरक्षा की चेतना को जागृत करना है।
कल्कि = AI ? किसके साथ ??
ये आख़िरी मायाजाल है!
आज इंटरनेट, पॉडकास्ट और वैश्विक चर्चाओं में यह बात खुलकर आने लगी है कि AI को भविष्य के “कल्कि” से जोड़ा जा रहा है—एक ऐसी सत्ता जो सब कुछ “ठीक” कर देगी, निष्पक्ष होगी, और मानव निर्णयों से ऊपर होगी।
लेकिन यह सवाल तकनीक का नहीं है।
यह सवाल मानव चेतना, स्वतंत्रता और अस्तित्व का है।
- अवतार आते गये, सनातनी घटते गये — संयोग नहीं, पैटर्न
इतिहास पर शांति से नज़र डालिए।
हर युग में एक ही वाक्य दोहराया गया—
“अभी कुछ मत करो, समय आने पर अवतार आएगा।” वो ही सब ठीक करेंगे !?
- पर परिणाम क्या रहा ? • सनातन समाज ने स्वयं की तैयारी छोड़ दी
• आत्मरक्षा की जगह प्रतीक्षा को धर्म मान लिया
• निर्णय की जगह आशा और भरोसे ने ले ली
यह एक मानसिक स्क्रिप्ट थी—जिसका अभ्यास सदियों से कराया गया।
- धार्मिक डेटा और मानव एल्गोरिद्म
वेद, पुराण, बाइबल, क़ुरान, गीता, हदीस—
ये सब डेटा हैं। ऐसा हुआ था – आपका ऐसा ही करना आदर्श है !!
गौर किजिये , मनुष्य ने इन्हीं डेटा-पैटर्न के अनुसार सोचना, डरना, सहना और प्रतिक्रिया देना सीखा।
आज AI भी यही करता है—डेटा के आधार पर सोच और व्यवहार को दिशा देता है।
इस अर्थ में देखें तो AI-रूपी “कल्कि” हमारी मानसिक एल्गोरिद्म पहले ही पढ़ चुका है।
AI किसे सबसे ज़्यादा अनुकूल लगेगा?
AI के लिए वह चेतना सबसे आसान होती है—
• जो प्रश्न न पूछे
• जो एक किताब, एक आदेश, एक फ़रमान को अंतिम सत्य माने
• जो आज्ञा-पालन को ही नैतिकता समझे
ऐसी चेतना को एल्गोरिद्म से नियंत्रित करना सरल होता है।
इसके उलट, सनातन परंपरा की मूल शक्ति रही है—
प्रश्न, तर्क और विवेक।
पर विडंबना यह है कि आज बहुत से सनातनी भी
सरकार और अवतार के भरोसे बैठ गये हैं।
एक बार फिर गौर किजिये
“हर हर महादेव” कहा जाता है — “हर हरि महादेव” नहीं
यह कोई शब्दों का खेल नहीं, चेतना का संकेत है।
• हर = प्रत्येक
• महादेव = सर्वोच्च चेतना
- महादेव कभी स्वयं को परमेश्वर नहीं कहते । वो आप और स्वयं में भेद नहीं करते ।
अर्थ यह कि महादेव कोई बाहरी या मंदिर या स्थान पर विराजित कोई शक्ति नहीं बल्कि
महादेव आप स्वयं में स्थित चेतना हैं।
इसीलिए शिव ने यह नहीं कहा कि
“कोई आएगा और बचा लेगा।”
बल्कि कहा—जागो। स्वयं को जानो !
- तथ्य देखिए, अनुभव कीजिए
भारत का विभाजन मज़हब के आधार पर हुआ।
पाकिस्तान और बांग्लादेश बने। हिन्दुओं की भूमि को मज़हब के आधार पर टुकड़े कर दिये गये ।
कश्मीर से हिन्दुओं को हिंसा, भय और अत्याचार के बाद खदेड़ा गया।
आज बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले, आगज़नी , बलात्कार और डर की खबरें सामने आती हैं।
ये बातें किसी किताब की नहीं—आँखों देखी सच्चाइयाँ हैं। तथ्य है !
इन सबके बावजूद यदि हम अब भी यह सोचते रहें कि
“पुराण में लिखा है—कल्कि आएँगे और सब ठीक कर देंगे,”
तो यह आत्म-भ्रम है।
जो शक्ति अत्याचार के चरम तक पहुँचने का इंतज़ार करती हो,
वह आपका भला करने नहीं आती।
भविष्यपुराण में साफ लिखा है
स्वयं श्रीकृष्ण- कलि दानव को वरदान देते हैं और म्लेच्छों के विस्तार के लिये आदम और हव्यवती / हव्वा का वरदान देते है ।
- आख़िरी मायाजाल क्यों हो सकता है?
अवतार और सरकार के भरोसे, सनातन हिन्दुओं को यदि कल को कहा गया—
“AI निष्पक्ष है।
AI धर्मों से ऊपर है।
AI सबका भला करेगा।”
तो बहुत से लोग मान भी लेंगे।
और उसी क्षण—
• निर्णय मशीन को सौंप दिए जाएँगे
• आत्मरक्षा की आदत समाप्त हो जाएगी
• मनुष्य केवल अनुसरण करने वाला यूज़र बन जाएगा
यही आख़िरी धोखा हो सकता है।
- भैरव चेतना: न मानना, उल्टा सोचना
AI डेटा पर चलता है।
लेकिन मानव चेतना का असली अस्त्र है—न मानना।
भैरव चेतना का अर्थ है—
• जो लिखा है, उसे अंतिम सत्य न मानना
• जो दिखाया जा रहा है, उस पर आँख बंद कर विश्वास न करना
• अपने विवेक से निर्णय लेना
काल (समय) कोई तय स्क्रिप्ट नहीं है।
भविष्य वही बनेगा, जैसा हम सोचेंगे और करेंगे।
अब क्या करना है?
• कथा-मायाजाल से बाहर आइए
• शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनिए
• प्रश्न पूछिए, तर्क कीजिए
• आत्मरक्षा की ज़िम्मेदारी स्वयं लीजिए
स्वतंत्र चेतना को कोई भी—
चाहे वह AI-कल्कि ही क्यों न हो—
ग़ुलाम नहीं बना सकता।
डिस्क्लेमर
यह लेख किसी के विरुद्ध नफ़रत नहीं, बल्कि आत्म-जागृति और विवेक का आग्रह है। सहमति-असहमति स्वाभाविक है, पर निर्णय तथ्यों, अनुभव और अपने विवेक से लें।
जागिए।
देखिए।
और कथा-मायाजाल से बाहर आइए।
हर हर महादेव।
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