मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने घोषणा की है कि अब राज्य में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले से आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवार सीधे लाभान्वित होंगे।

वाणिज्यिक कर मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने बताया कि अब जमीन और मकान की रजिस्ट्री अधिक सरल, सुलभ और कम खर्चीली होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी संपत्ति का बाजार मूल्य एक करोड़ रुपये है, तो अब नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की बचत होगी। मंत्री ने बताया कि यह केवल कर में राहत नहीं, बल्कि सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता और उनके परिश्रम एवं सपनों के सम्मान का प्रतीक है।

सरकार ने पंजीयन प्रक्रिया को भी आधुनिक और पारदर्शी बनाया है। इसके तहत अब मोबाइल ऐप, स्वतः नामांतरण, आधार आधारित सत्यापन और स्मार्ट पंजीयन कार्यालय जैसी सुविधाएं जनता के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। इससे पंजीयन प्रक्रिया तेज़ और सुरक्षित हुई है, और परिवारों को महीनों लंबी प्रक्रिया से राहत मिली है।

इसके अलावा, गाइडलाइन मूल्य आधारित शुल्क प्रणाली लागू की गई है। इसका मतलब है कि अब पंजीयन शुल्क संपत्ति के वास्तविक लेनदेन मूल्य के बजाय गाइडलाइन मूल्य पर ही लगेगा। इससे बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि के अत्यधिक मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर पर आधारित होगा।

मंत्री चौधरी ने बताया कि किसानों के लिए भी कई राहतकारी कदम उठाए गए हैं। कृषि भूमि, नकदी फसल, तालाब मछली पालन जैसी संपत्तियों पर पहले लगाए जाने वाले अतिरिक्त मूल्यांकन अब समाप्त कर दिए गए हैं। इसी तरह, शहरों और गाँवों में अतिरिक्त मूल्यांकन और अनावश्यक शुल्क को भी हटाया गया है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए फ्लैट का मूल्यांकन अब केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा।

इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति पंजीयन अब सुलभ, न्यायसंगत और कम खर्चीली हो गई है। इससे राज्य में संपत्ति के लेन-देन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आम जनता को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कदम केवल कर में राहत नहीं है, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है, जो अपनी मेहनत से जमीन खरीदते, घर बनाते और संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं।

साथ ही, पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों के कारण प्रतिवर्ष लगभग 460 करोड़ रुपये का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से संपत्ति पंजीयन अब तेज़, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गया है।

इस निर्णय के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सम्मानजनक और किफायती बनाना है। यही कारण है कि अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त करने का यह कदम आम नागरिकों, किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा निर्णय माना जा रहा है।

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