हरियाणा की राजनीति में इस वक्त एक नई सियासी तूफान खड़ा हो गया है। राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के अंदर उठी सियासी आंधी अब खुले रूप में बगावत की तरफ बढ़ती नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग के मुद्दे ने पार्टी के भीतर ऐसा संकट पैदा कर दिया है कि कई विधायक अब खुलकर पार्टी हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।
यानी, जो मामला पहले अंदरखाने ही था, अब सार्वजनिक हो चुका है।

क्रॉस वोटिंग से उभरा विवाद

पार्टी ने जिन विधायकों पर कार्रवाई की संभावना जताई थी, वही अब आक्रामक तेवर में हैं और पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सीधे निशाना साध रहे हैं।
हालांकि, कांग्रेस इस चुनाव में जीत हासिल करने में सफल रही, लेकिन इस जीत ने पार्टी के भीतर गहरी दरारों और असंतोष को उजागर कर दिया।

विशेष रूप से, चार वोट रद्द होने और एक वोट तकनीकी कारणों से खारिज होने के बावजूद पार्टी को संघर्ष करना पड़ा। यह साफ संकेत देता है कि संगठन में अंदरूनी स्थिति संतुलित नहीं है।

नेतृत्व के सामने चुनौती: अनुशासन बनाम संख्या

अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

  • अनुशासन को बनाए रखा जाए या संख्या की सुरक्षा की जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पार्टी क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर सख्त कार्रवाई करती है, तो विधानसभा में उनकी संख्या घट सकती है।
और यही स्थिति 2028 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है।

2028 में राज्यसभा सीटों की चुनौती

हरियाणा से 2028 में दो राज्यसभा सीटें खाली होंगी।
अगर मौजूदा हालात जस के तस रहे, तो उन सीटों पर जीत कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बगावत बढ़ने पर पार्टी में खुली टूट देखने को मिल सकती है और कांग्रेस को गठबंधन या बाहरी समर्थन पर निर्भर होना पड़ सकता है।

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